-सूफी खान
यमन के अंसारुल्लाह ने जिस तरह सऊदी समर्थक फोर्सेस को यमन के अंदर और सरहद के पार सऊदी के एडवांस डिफेंस सिस्टम को पानी पिलाना शुरू किया है और एयरपोर्ट्स पर मिसाइलें मारनी शुरू की हैं, उसने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विजन २०३० को बहुत बड़ा झटका दिया है।
दरअसल, सऊदी की मौजूदा हुकूमत ने अपनी इकोनॉमी को सिर्फ तेल पर निर्भरता से निकालने का एक बहुत बड़ा सपना देखा है और उस पर काम भी जोर-शोर से चल रहा है। लेकिन यमन के साथ जंग ने इस प्रोग्राम को बड़ा झटका दिया है। यह सीधे मोहम्मद बिन सलमान के उस ख्वाब की तबाही का सबब बन रहा है, जो उन्होंने बरसों से देख रखा है। इसके तहत सऊदी में बाहरी इन्वेस्टमेंट से लेकर टूरिज्म और कई दूसरे मोर्चों पर काम चल रहा है। इसके लिए वक्त-वक्त पर बड़े सेमिनार, इन्वेस्टर्स मीट और जलसे होते रहते हैं।
मीडिया रिपोर्टें बता रही हैं कि सऊदी में हाल ही में एक ऐसा जलसा होना था, जिसे एनर्जी कांग्रेस का नाम दिया गया है। इसमें दुनिया की बड़ी-बड़ी पेट्रोलियम कंपनियों के सीईओ शामिल होते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि दुनिया में पेट्रोलियम के इकोसिस्टम का सरताज सऊदी अरब है, लेकिन इस बार सवाल उठ रहा है कि यह बड़ा कार्यक्रम सऊदी में हो पाएगा या नहीं।
जब से हूतियों की मिसाइलों ने रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया है, तब से खौफ के हालात बन गए हैं। सिर्फ रियाद ही नहीं, सऊदी अरब के दूसरे हवाई अड्डों पर भी अंसारुल्लाह कहर बरपा रहे हैं।
इससे डर का माहौल बन गया है। बाहर से इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने आने वाले मेहमान अब आने से बच रहे हैं। मीडिया रिपोर्टें कहती हैं कि अब सऊदी उन्हें कितना भी समझाए, लेकिन दूसरे देशों के मेहमान इस साल आने से परहेज कर सकते हैं। खबर तो यह भी है कि सऊदी अरब अब ओमान के जरिए हूतियों को संदेश भी भिजवा रहा है कि एक महीने का सीजफायर कर लिया जाए और साल २०२२ वाले रोडमैप को लागू करने की कोशिश की जाए। साल २०२२ के समझौते में हूती और सऊदी, दोनों सहमत हो गए थे। अगर ऐसा है, तो क्या हूती इसे मानेंगे? यह बड़ा सवाल है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अब यमन के हूती शायद ही इस विचार को गंभीरता से लें, क्योंकि अंसारुल्लाह भी वक्त की नजाकत को समझ रहे हैं। वे जानते हैं कि यह ऐसा वक्त है, जिसमें सऊदी अरब को झुकाया जा सकता है, क्योंकि दुनिया के बेहद अहम तेल उत्पादक देश सऊदी अरब में इस डिस्टर्बेंस से ग्लोबल मार्केट पर सीधा असर पड़ रहा है। यही वजह है कि हूती सऊदी पर और प्रेशर बनाकर रखना चाहते हैं।
