सूफी खान
-क्या जंग और भयानक होगी?
यमन के हूती सऊदी अरब पर इस कदर हमले कर रहे हैं कि वहां मौजूद अमेरिका भी घबरा गया है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया है। जिस तरह हूती सऊदी अरब के हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं, उससे अमेरिका को वहां मौजूद अपने नागरिकों की चिंता सताने लगी है। अभी तक अमेरिका सऊदी-हूती जंग में सीधे नहीं उतरा है और यमन में हूतियों से भिड़ने का उसका पुराना अनुभव बहुत खराब रहा है।
हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे पर जमकर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। बुधवार को हुए ताजा हमलों में तीन लोगों की मौत हुई थी। इनमें दम्माम के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला और एक तेल प्रतिष्ठान पर किया गया ड्रोन हमला शामिल है।
अमेरिकी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने भी सऊदी अरब में दूतावास के कर्मचारियों को हटाए जाने के आदेश की पुष्टि की है। हालांकि, पिगॉट ने साफ किया कि यह आदेश केवल सऊदी अरब में मौजूद उन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों पर लागू होता है, जिनकी वहां मौजूदगी जरूरी नहीं है। ऐसे कर्मचारियों को अमेरिका वापस बुलाया जाएगा। अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने के पीछे सऊदी अरब में हूतियों द्वारा आम लोगों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों का हवाला दिया गया है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि हालात तेजी से और अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के संकेतों और कदमों से लगता है कि अंसारुल्लाह सऊदी अरब पर और भी तगड़े हमले कर सकता है। इतना ही नहीं, सऊदी अरब के सीमावर्ती प्रांतों पर भी खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, नजरान, जिजान और असीर ये तीनों प्रांत १९३४ से पहले यमन का हिस्सा हुआ करते थे। १९३४ में सऊदी अरब और यमन के बीच जंग हुई थी। उस समय यमन हार गया था और सऊदी अरब ने ब्रिटेन की मदद से ये तीनों इलाके अपने कब्जे में ले लिए थे। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि आज भी वहां के लोग खुद को यमनी मानते हैं। कुछ पत्रकार तो यह भी दावा कर रहे हैं कि सऊदी अरब के सीमावर्ती इलाकों से लेकर यमन तक यह चर्चा चल पड़ी है कि वे अपना हिस्सा सऊदी अरब से वापस लेकर रहेंगे।
यही वजह है कि अमेरिका सतर्क हो गया है। हालांकि, सऊदी अरब भी पूरी ताकत से यमन के हूतियों का मुकाबला कर रहा है। वह भी इस जंग को निर्णायक बनाना चाहता है, ताकि यमन के हूतियों पर नियंत्रण किया जा सके। यमन के एक हिस्से में सऊदी समर्थित सरकार नहीं रही तो हूती पूरे देश पर कब्जा कर सकते हैं। यह दुनिया के लिए एक और बड़ी समस्या बन जाएगी। यही वजह है कि अमेरिका भी सतर्क है।
हाल के दिनों में जारी अमेरिकी सुरक्षा अलर्ट में कहा गया था कि अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को सऊदी अरब के किसी भी हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी। हूती विद्रोहियों ने बार-बार रियाद के किंग खालिद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया है। गंभीर हमले के बाद यह हवाई अड्डा १० अक्टूबर से बंद था। हालांकि, बुधवार को सीमित संख्या में सऊदी एयरलाइंस की उड़ानों का संचालन फिर से शुरू हुआ। इसके बावजूद लुफ्थांसा और एयर फ्रांस जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने नवंबर के मध्य तक अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं।
