सूफी खान
संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई का आरोप है कि ईरान ने उसके फुजैराह पोर्ट सहित कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। हालांकि, ईरान की तरफ से ना तो इसे नकारा जा रहा है और ना ही स्वीकार किया जा रहा है। इन हमलों के बाद इजरायल के लिए खतरा बढ़ गया है। विश्लेषकों का कहना है कि इजरायल जल्द ही एक बार फिर ईरान के निशाने पर हो सकता है। बड़ा सवाल ये है कि अगर हमले ईरान की तरफ से हुए हैं तो फिर ईरान इसे स्वीकार क्यों नहीं कर रहा है? एक्सपर्ट कहते हैं कि इसकी वजह सीजफायर हो सकता है। अगर ईरान ये मान ले कि उसने ही यूएई पर हमले को अंजाम दिए हैं तो फिर ये सीजफायर का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। जानकार ये भी कहते हैं कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के पैटर्न पर चलकर ही उनसे मुकाबला कर रहा है। लेबनान हो या कहीं और सीजफायर के बीच में ही इजरायल भी तो हमले कर देता है, लेकिन चुप्पी साध लेता है। वही काम अब ईरान कर रहा है।
कहा जा रहा है कि जिस तरह अरब देशों खासकर यूएई में अमेरिकी और इजरायली हथियार और डिफेंस सिस्टम उतर रहे हैं। इस बार जमीन पर फौज उतारने के लिए हथियार जमा किए जा रहे हैं। उसी को देखते हुए हो सकता है ईरान ने यूएई के उन ठिकानों पर अटैक किया हो, जहां ये हथियार रखे गए हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिका और इजरायल तक भी ईरान में ग्राउंड पर नहीं उतरेंगे, बल्कि यूएई, सूडान और यमन में मौजद अपने प्रॉक्सी या हिमायती संगठन को ईरान में उतारने की तैयारी कर रहे है। इसी खतरे को भांप कर ईरान ने ताजा कार्रवाई की हो, ऐसी अटकलें भी हैं।
ऐसे में बड़ा प्रश्न ये भी है कि क्या मिडिल ईस्ट या वेस्ट एशिया में फिर एक बड़ी और भयानक जंग होने जा रही है? तो इसका जवाब है फिलहाल नहीं। जानकार मानते हैं कि अमेरिका मिडटर्म इलेक्शन से पहले इस तरह की रिस्क नहीं लेगा। हां, ये हो सकता है कि ईरान टारगेट करके इस तरह के हमलों को खामोशी से अंजाम भी देता रहे, लेकिन इसे स्वीकार नहीं करे। यूएई पर ये हमले ऐसे समय में हुए जब अमेरिका ने अपने दो विध्वंसक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए फारस की खाड़ी में भेजा है। ट्रंप ने प्रोजेक्ट प्रâीडम की घोषणा की है, जो सोमवार को शुरू हुआ है। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोलना है। इसके पहले अमेरिका ने युद्धविराम का इस्तेमाल करते हुए एक विशाल नौसैनिक, हवाई और जमीनी सेना तैयार कर ली होगी, ऐसा भी माना जा रहा है।
