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नेपाल को चाहिए युवा नेतृत्व!..बूढ़े नेताओं से ऊबी युवा पीढ़ी

नेपाल में लगी आग बुझ नहीं रही। सरकार प्रदर्शनकारियों के सामने झुक चुकी है, मगर जेन-जेड पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस्तीफा दे चुके हैं, डिप्टी सीएम समेत अन्य १० मंत्री भी अपना पद छोड़ चुके हैं। मगर युवाओं का गुस्सा थम ही नहीं रहा। नेपाल में युवाओं के प्रदर्शन को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अब नेपाल में युवा पीढ़ी बूढ़े नेताओं से ऊब चुकी है और यही वजह है कि अब देश युवा नेतृत्व चाहता है। इस हिंसक आंदोलन को देखते हुए ये संकेत मिल रहे हैं कि विरोध की यह `आग’ किसी भी देश में पैदा हो सकती है। हिंदुस्थान में भी।
दरअसल, नेपाल में सरकार के तानाशाही रवैए ने ही यह `आग’ लगाई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का यह आक्रोश किसी भी देश में देखने को मिल सकता है।
बता दें कि इन दिनों हिंदुस्थान में भी बढ़ते भ्रष्टाचार और सरकार के तानाशाही रवैए से जनता त्रस्त हो चुकी है। सोशल मीडिया पर अब खुलेतौर पर मोदी सरकार का विरोध जताया जा रहा है। नेपाल के हालातों को देखते हुए अब हिंदुस्थान में भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि नेपाल के हालात को देखते हुए भाजपा को भी इससे सबक सीखना चाहिए, क्योंकि अब यहां की युवा पीढ़ी भी बूढ़े नेताओं से ऊब चुकी है। ऐसे में और नेपाल जैसी परिस्थिति हिंदुस्थान में पैदा न हो उससे पहले ही ७५ वर्ष पार वालों को सत्ता का मोह छोड़ देना चाहिए। बता दें कि सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाए जाने से युवाओं का गुस्सा फूटा है।
नेपाल से फ्रांस तक डोला सिंहासन
बता दें कि नेपाल जैसे ही कुछ हालात इस समय दुनिया के अन्य देशों में भी है। इनमें ताकतवर देशों में शुमार फ्रांस भी शामिल है। जापान, थाईलैंड और इंडोनेशिया समेत मिडिल ईस्ट और अफ्रीका महाद्वीप के कई देश राजनीतिक अस्थिरता के द्वंद्व में ऐसे फंस चुके हैं, जिससे बाहर ही नहीं आ पा रहे। खास बात ये है कि इन सभी देशों की समस्या भले ही एक हो, लेकिन कारण अलग-अलग हैं।

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