खुशबू सिंह
चित्तूर जिले के बालाजीनगर कॉलोनी में एक युवा महिला, यास्मीन भानु की हत्या ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। यह मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि जातीय‑धर्मीय अंतर और ऑनर किलिंग की गंभीरता को उजागर करता है।
शुरुआत
यास्मीन भानु शौकत अली और मुमताज की बेटी, एमबीए पास, २६ वर्षीय। साईं तेजा कोदंडा राम और बुज्जी के बेटे, बीटेक स्नातक, अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से थे। यास्मीन के माता‑पिता ने साईं के साथ शादी का विरोध किया, क्योंकि वह दलित समुदाय से था।
प्रेम और विवाह
– कॉलेज के दिनों में यास्मीन और साईं एक‑दूसरे से प्यार कर बैठे। ९ फरवरी २०२५ को नेल्लोर में शादी कर ली। १३ फरवरी को सुरक्षा की मांग करते हुए तिरुपति डीएसपी से मदद ली। दोनों परिवारों को बुलाकर काउंसलिंग की और ‘नवविवाहित को कोई हानि न पहुंचाने’ की चेतावनी दी।
घटना से पहले की घटनाएं
– शादी के बाद लगभग दो महीने तक यास्मीन और साईं सामान्य जीवन व्यतीत करते रहे। यास्मीन के पिता शौकत अली की तबीयत खराब होने की बात कहकर परिवार ने यास्मीन को बार‑बार फोन किया और घर आने का दबाव बनाया।
हत्या का क्रम
रविवार की सुबह साईं ने यास्मीन को चित्तूर के गांधी चौक से उसके भाई की कार में बैठाया और उसके पैतृक घर भेज दिया। यास्मीन घर पहुंचने के बाद थोड़े समय में ही गायब हो गई। साईं ने कई बार यास्मीन और उसके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, पर कोई जवाब नहीं मिला। साईं ने संदेह के कारण यास्मीन के घर जाकर देखा तो पता चला कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। यास्मीन के परिवार ने पहले कहा कि वह घर पर नहीं है, फिर बताया कि उसने आत्महत्या कर ली है।
पुलिस कार्रवाई
– यास्मीन का शव चित्तूर के सरकारी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया। पिता शौकत अली और बड़ी बहन का बेटा लालू फरार हो गए। पुलिस ने संदिग्ध मौत का मामला दर्ज किया। चित्तूर के प्रभारी डीएसपी प्रभाकर के नेतृत्व में जांच शुरूआत। अभी तक शौकत अली और लालू की गिरफ्तारी नहीं हुई है। डीएसपी प्रभाकर की टीम द्वारा घटना के कारणों, संभावित साक्ष्यों और गवाहों की खोज जारी है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस ऑनर किलिंग की निंदा करते हुए न्याय की मांग की है।
सामाजिक एवं कानूनी प्रभाव
-जातीय अंतर के कारण इस हत्या ने सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया है। ऑनर किलिंग के खिलाफ मौजूदा कानून (उदाहरण: भारतीय दंड संहिता की धारा ३०२, ३०४-बी) के तहत सख्त कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। इस घटना ने पुलिस को सुरक्षा उपायों की पुन: समीक्षा करने और अंतर‑जातीय विवाहों में सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रेरित किया है।
