खुशबू सिंह
उत्तर प्रदेश, १९८५: एक छोटे से गांव में एक ऐसी घटना घटी, जिसने विज्ञान और आध्यात्मिकता के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया। सुमित्रा सिंह, एक साधारण ठाकुर परिवार की बेटी थीं। मृत्यु के कगार पर पहुंचीं, फिर जीवित हो गर्इं और जब वो वापस लौटीं तो वो सुमित्रा नहीं थीं। उन्होंने दावा किया कि वो शिवा त्रिपाठी हैं। एक ब्राह्मण महिला, जो दो महीने पहले १०० किलोमीटर दूर दिबियापुर में अपनी ससुराल वालों द्वारा कथित तौर पर मारी गई थी।
एक दुखद अंत और नई शुरुआत
शिवा त्रिपाठी, एक शिक्षित ब्राह्मण महिला, ने अपने ससुराल में तनाव और उत्पीड़न का सामना किया था। १८ मई, १९८५ की रात, ससुराल वालों के साथ झगड़े के बाद उनकी लाश रेलवे ट्रैक पर मिली थी। क्या ये आत्महत्या थी या हत्या? उनके पिता, राम सिया त्रिपाठी, ने हत्या का आरोप लगाया, जिससे मामला सुर्खियों में आ गया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। दो महीने बाद जुलाई १९८५ में, इधर सुमित्रा सिंह, जो शरीफपुरा गांव में रहती थीं, ने भविष्यवाणी की कि वो मरनेवाली हैं। १९ जुलाई को वो बेहोश हो गर्इं, उनकी सांसें और नाड़ी रुक गर्इं। परिवार ने उन्हें मृत मान लिया, लेकिन अचानक वो जीवित हो उठीं। जब वो होश में आर्इं तो उन्होंने अपने पति और बेटे को नहीं पहचाना। उन्होंने कहा, ‘मैं शिवा हूं,’ और दिबियापुर में हुई अपनी हत्या की कहानी सुनाई। उसने शिवा के जीवन के ऐसे विवरण बताए, जो केवल शिवा ही जान सकती थी।
सुमित्रा ने शिवा के परिवार के २३ लोगों को चाहे व्यक्तिगत रूप से या तस्वीरों में सटीक रूप से पहचाना। उसने शिवा के बच्चों, टिंकू और रिंकू के बारे में पूछा और अपनी सास को ‘माताजी’ कहकर संबोधित किया। उसकी साक्षरता में अचानक सुधार हुआ; वो अब धाराप्रवाह हिंदी पढ़ और लिख सकती थी, जैसा कि शिवा करती थी। उसने ब्राह्मणों की तरह व्यवहार करना शुरू किया, जो उसके ठाकुर परिवार के लिए अजीब था। शोधकर्ता डॉ. इयान स्टीवेंसन और डॉ. सत्वंत पसरीचा ने इस मामले की गहन जांच की। उन्होंने ५३ लोगों से साक्षात्कार लिया और पाया कि दोनों परिवारों का पहले कोई संपर्क नहीं था। सुमित्रा के पास शिवा के जीवन की जानकारी सामान्य तरीके से नहीं हो सकती थी। क्या ये पुनर्जनन था या आत्मा का कब्जा? सुमित्रा ने दावा किया कि मृत्यु के बाद वो यमराज के सामने गई थी, जहां उसने पापियों को दंडित होते देखा। अपने अच्छे कर्मों के कारण उसे सुमित्रा के शरीर में वापस भेजा गया।
एक अनसुलझा रहस्य
ये मामला विज्ञान और आध्यात्मिकता के बीच की खाई को पाटने की कोशिश करता है। कुछ इसे पुर्नजन्म मानते हैं, जबकि अन्य इसे आत्मा के कब्जे का मामला कहते हैं। सुपर-साई सिद्धांत के अनुसार, सुमित्रा ने टेलीपैथी के जरिए जानकारी प्राप्त की हो सकती है, लेकिन उसकी निरंतरता और शिवा के व्यक्तित्व का पूर्ण अवतार इसकी व्याख्या को जटिल बनाता है। ये कहानी हमें आत्मा, चेतना और जीवन के अर्थ पर विचार करने के लिए मजबूर करती है। क्या मृत्यु वास्तव में अंत है या ये एक नई शुरुआत है?
