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मैथिली भाषा के तर्ज पर मगही एवं भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची तथा सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल करे सरकार- कांग्रेस

अनिल मिश्र / पटना

देश के बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित कई राज्यों में प्रचलित, जन-जन की बोलचाल तथा लिखने-पढ़ने की भाषा मगही एवं भोजपुरी को भी मैथिली भाषा के तर्ज़ पर संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार से की है।
इस संबंध में मांग करने वालों में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो. विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, विशाल कुमार, इंटक जिला महासचिव टिंकू गिरी, रूपेश चौधरी, अशोक राम, कृष्ण कानू आदि शामिल हैं।
इन नेताओं ने कहा कि वर्षों से मगही एवं भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को सरकार अनसुनी कर रही है, जिससे करोड़ों लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। साथ ही, इन भाषाओं को पढ़ने-लिखने वाले लोगों को विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रायोगिक परीक्षाओं में शामिल नहीं होने से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मगही और भोजपुरी भाषाओं की पढ़ाई केवल मगध विश्वविद्यालय एवं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में कराने संबंधी राज्य सरकार के आदेश का भी पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है।
इस संबंध में नेताओं ने कहा कि भोजपुरी भाषा कला एवं मनोरंजन के क्षेत्र में काफी मशहूर है। इस भाषा की फिल्में व्यापक रूप से प्रचलित हैं, जो बॉलीवुड फिल्मों को भी कड़ी टक्कर दे रही हैं।
वहीं, नेताओं ने कहा कि मगही भाषा की मिठास एवं मगध का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली है। इसकी पढ़ाई होने से इस भाषा की महत्ता और बढ़ेगी।
इस बीच नेताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से अविलंब इन दोनों प्रचलित भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची तथा सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग दोहराई है।

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