अमिताभ श्रीवास्तव
इधर आईपीएल चल रहा है उधर एक क्रिकेटर के घर डेड बॉडी मिलने से सनसनी पैâल गई है। बात श्रीलंका की है। श्रीलंका के क्रिकेट के दिग्गज और १९९६ वर्ल्ड कप विजेता टीम के हीरो अरविंद डी सिल्वा के घर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। श्रीलंकन एयरलाइंस के पूर्व सीईओ कपिला चंद्रसेना कोलंबो के कोल्लुपिटिया इलाके में स्थित अरविंदा डी सिल्वा के घर में मृत पाए गए। पुलिस के मुताबिक, कपिला चंद्रसेना का शव पेड्रिस प्लेस स्थित घर में मिला, जो अरविंद डी सिल्वा का बताया जा रहा है। शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, हालांकि मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही साफ होगी। कपिला चंद्रसेना और अरविंद डी सिल्वा रिश्तेदार भी थे। दोनों परिवारों के बीच करीबी संबंध बताए जा रहे हैं। चंद्रसेना की पत्नी प्रियंका नियोमाली विजयनायक और अरविंद डी सिल्वा की पत्नी अनुष्का डी सिल्वा बहनें हैं। बताया गया कि कपिला गुरुवार को ही अरविंद के घर पहुंचे थे। कपिला चंद्रसेना पिछले कुछ समय से एक बड़े भ्रष्टाचार मामले को लेकर चर्चा में थे। उन पर और उनकी पत्नी पर २.३ बिलियन अमेरिकी डॉलर के विमान खरीद सौदे में रिश्वत लेने के आरोप लगे थे।
संदेश में छिपा सात्विक रहस्य
क्रिकेट के अलावा वैसे भी अन्य खेल भारत में अधिक ख्याति नहीं बटोर पाते। उनके खिलाड़ी चाहे जितनी बड़ी जीत दर्ज कर लें कभी कभी तो पता ही नहीं चलता कि उनका नाम क्या है। अब देखिये न विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज सात्विक और चिराग शेट्टी की जोड़ी, जो एशियाई खेलों की चैंपियन है, उस भारतीय टीम का हिस्सा थी जिसने हाल ही में डेनमार्क में थॉमस कप में कांस्य पदक जीता था, लेकिन ज्यादा किसी को पता नहीं चला। सात्विक ने सोशल मीडिया पर अपना दुख व्यक्त किया था एक ऐसे संदेश से जिसमें रहस्य था। वह यह कि जीत की खुशी तो है, मगर देश में उन्हें वैसा सम्मान नहीं मिला। खैर, सात्विक ने फिर एक स्पष्टीकरण देकर इस मुद्दे पर अपनी बात कही है। डेनमार्क से घर लौटने के बाद, सात्विक ने लिखा, ‘अब घर वापस आ गया हूं। हमेशा की तरह, किसी को नहीं पता कि पिछले दो हफ्तों में क्या हुआ, और ऐसा लगता है कि किसी को वास्तव में परवाह भी नहीं है।’ मेरे ये शब्द व्यक्तिगत प्रसिद्धि पाने या दूसरों की उपलब्धियों का श्रेय छीनने की चाहत से नहीं निकले थे। मैं हर उस एथलीट का बहुत सम्मान करता हूं, जो भारत को गौरव दिलाता है, चाहे वह किसी भी खेल से जुड़ा हो। उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा संदेश सीधा-सादा था: हमें एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है जो हर जीत को, चाहे वह छोटी हो या बड़ी, प्रोत्साहित करे और उसका जश्न मनाए।’ हमें पैसा या भव्य परेड नहीं चाहिए; हम बस इतना जानना चाहते हैं कि हमारा देश हमें देख रहा है और हमारे प्रयास नजर आ रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर सभी खेलों को एक ही जोश और नजरिए से समर्थन दें।’
