अमिताभ श्रीवास्तव
क्या कभी किसी माता पिता ने यह समझा है कि उनके आपसी मतभेद उनके बच्चों को झेलने पड़ते हैं? उनके बीच स्वार्थगत तलाक तो हो जाता है किंतु उनके बच्चों का बचपन छीन लिया जाता है। इस अपराध को शायद ही कोई कानून समझ सकता हो। बचपन में पड़ी अलगाव की यह ग्रंथि बच्चे के भविष्य को तहस नहस कर देती है। अब देखिये न प्रिंसेस आंद्र आज भले ही समाज में अपनी एक साफ सुथरी छवि लेकर आई हो मगर बचपन में मात-पिता के मध्य तलाक ने उसे तोड़ दिया, अनजाने ही उसका बचपन छीन लिया गया। उसने अपनी चर्चित व सेलेब्रेटी मां केटी प्राइस के तलाक के बारे में बहुत दुखी मन से बात करते हुए कहा कि ‘काश उनका बचपन खुशहाल होता।’ १८ वर्षीया राजकुमारी आंद्रे केटी प्राइस और पीटर आंद्रे की बेटी हैं। चार साल की शादी के बाद २००९ में इस जोड़े का अचानक अलगाव हो गया जब प्रिंसेस सिर्फ दो साल की थी। प्रिंसेस आंद्रे इतनी छोटी थी कि उसके मस्तिष्क में अपने माता-पिता की साथ वाली कोई स्मृति नहीं है। उसके पास यदि कुछ है तो वह है अपनी मां केटी की कीरन हेलर से तीसरी शादी के टूटने की दर्दनाक यादें। क्योंकि तब वह समझने लायक उम्र की हो चुकी थी। अपनी नई आईटीवी२ श्रृंखला द प्रिंसेस डायरीज में आंद्रे ने अपने बचपन के दिनों के बारे में बताया और स्वीकार किया कि मां-बाप के बीच तलाक में बच्चों को जिंदगीभर भुगतना होता है जिनकी कोई गलती नहीं होती। इस शो के माध्यम से आंद्रे ने दुनिया से आग्रह किया है कि बच्चों का बचपन छिनने से बच सके, इसके लिए मां-बाप साथ रहें। क्योंकि मां बाप के मध्य तलाक उनके बच्चों के लिए उम्रभर की पीड़ा बन जाता है।
जब जीत जाती हैं उम्मीदें
यह कोई झूठा कथन नहीं है कि उम्मीद एकदिन जीत में बदलती है। उम्मीदें व्यक्ति को हौसला देती हैं, प्रतीक्षा के दिनों में स्थिर रखती हैं और जीत का रास्ता तय करती हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है वो बालक जिसके जीवित रहने पर डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे मगर वो न केवल जिंदा रहा बल्कि एक ऐसी दौड़ भी जीता जो ब्रिटेन की काफीr मानी जाने वाली दौड़ होती है। जी हां, दो वर्षीय बच्चा ने ब्रिटिश ट्रांसप्लांट गेम्स में रजत पदक जीता है। जिसकी जान एक नए लिवर द्वारा बचाई गई थी, और वह प्रेरणा स्त्रोत बनकर उभरा है। माइला डफी वो बच्चा है जिसका लिवर खराब था और उसके जिंदा रहने की सम्भावनाएं लगभग न के बराबर थी। मगर न केवल सफल प्रत्यारोपण हुआ बल्कि एक बाधा दौड़ स्पर्धा में दूसरा स्थान भी प्राप्त किया। यह उसके माता-पिता लौरा और लियाम डफी के लिए गर्व का क्षण था, जिन्हें बताया गया था कि उनका बच्चा अपना पहला जन्मदिन देखने तक जीवित नहीं रह पाएगा, क्योंकि वह क्षतिग्रस्त पित्त नलिकाओं के साथ पैदा हुआ था। माइला के बचने की एकमात्र उम्मीद प्रत्यारोपण थी, इसलिए लौरा की सबसे अच्छी दोस्त नेडियन मार्शल ने उसके यकृत का एक हिस्सा दान कर दिया। नेडियन का अहसान तो वो मां बाप कभी नहीं भुला सकते। उन्होंने कहा भी कि ‘उन्होंने माइला के लिए जो किया है, मैं उसका ऋण कभी नहीं चुका पाऊंगी – वह एक सच्ची हीरो हैं। प्रत्यारोपण के बाद कुछ स्वस्थ होने पर उस बच्चे ने जब रेस जीती तो सोचिए मां-बाप को कितनी खुशी मिली होगी साथ ही उनकी उस उम्मीद से अन्य लोगों को हौसला मिला होगा कि मजबूती से यदि खड़े रहें तो भगवान भी साथ देता है।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)
