सना खान
खुद से दूर होने से, खुद को पाने तक
अब मैं खुद को साबित नहीं करूंगी
खुद को मनाना छोड़ देने के बाद एक और सच सामने आता है अब हमें खुद को साबित करने की जरूरत नहीं होती। पहले हम हर बात समझाते थे, हर इरादा साफ करते थे, हर बार यह जताने की कोशिश करते थे कि हम गलत नहीं हैं। क्योंकि हमें लगता था कि अगर हम सही हैं, तो हमें समझा लिया जाएगा। लेकिन धीरे-धीरे समझ आया कि हर सच्चाई को समझा नहीं जा सकता और हर इंसान समझना भी नहीं चाहता। अब हम हर बात पर सफाई नहीं देते, हर सवाल का जवाब नहीं देते, हर शक का बोझ नहीं उठाते। क्योंकि अब पता है कि जिसे भरोसा होता है, उसे सबूत नहीं चाहिए होता। और जिसे भरोसा नहीं होता, उसे सबूत भी कम लगते हैं। पहले हम डरते थे कि कहीं हमें गलत न समझ लिया जाए। अब हम जानते हैं कि जो समझना चाहता है, वो बिना बोले भी समझ लेता है। और जो नहीं समझना चाहता, वो बोलने पर भी नहीं समझता। अब हम हर नजर में सही दिखने की कोशिश नहीं करते, हर जगह अपने लिए जगह नहीं बनाते। क्योंकि अब समझ आ गया है कि हर जगह हमारी जरूरत नहीं होती और हर जगह होना जरूरी भी नहीं होता। अब हम खुद को कम नहीं करते, किसी के हिसाब से नहीं बदलते, किसी की सुविधा के लिए खुद को छोटा नहीं करते। क्योंकि अब हम जानते हैं कि खुद को छोटा करके कभी कोई रिश्ता बड़ा नहीं होता।
और इस बार अगर कोई हमें गलत समझे तो हम उसे समझाने नहीं जाएंगे, क्योंकि अब हमें पता है कि हम कौन हैं। अब हम हर जगह फिट होने की कोशिश नहीं करते, क्योंकि अब हमें पता है कि हर जगह हमारा होना जरूरी नहीं है और जहां हम जैसे हैं, वैसे नहीं रह सकते, वहां रहना भी जरूरी नहीं है और इस बार हम खुद को साबित नहीं करेंगे कि हम बस खुद रहेंगे। बिना शोर के, बिना किसी को मनाए, बिना खुद को बदले। क्योंकि अब हमें किसी की मंजूरी नहीं चाहिए, अब हम खुद के लिए काफी हैं।
