मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा : खामोशी का दर्द

फलसफा : खामोशी का दर्द

सना खान

लोगों को लगता है कि जो इंसान चुप है उसे फर्क नहीं पड़ता। पर सच यह है कि कभी-कभी वही इंसान सबसे ज्यादा महसूस कर रहा होता है, बस अब उसने कहना छोड़ दिया होता है। क्योंकि हर बार समझाए जाने के बाद भी जब कोई समझे नहीं तो इंसान बोलना नहीं, उम्मीद रखना भी छोड़ देता है। लोगों को लगता है कि जो आगे बढ़ गया वो भूल गया। पर सच यह है कुछ लोग भूलते नहीं बस अपनी यादों के साथ अकेले जीना सीख लेते हैं। वो अब नाम नहीं लेते, जिक्र नहीं करते पर इसका मतलब यह नहीं कि वो मायने नहीं रखता। लोगों को लगता है कि जो मुस्कुरा रहा है वो खुश है। पर सच यह है मुस्कान अक्सर एक आदत बन जाती है, ताकि कोई पूछे नहीं ‘तुम ठीक तो हो ना?’ क्योंकि हर किसी के पास सच सुनने का धैर्य नहीं होता सबको बस एक जवाब चाहिए होता है ‘मैं ठीक हूं।’ लोगों को लगता है कि जो रिश्ते में रुका हुआ है वो मजबूत है। पर सच यह है कई बार वो मजबूत नहीं बस थक चुका होता है। उसे पता होता है कि यह रिश्ता उसे तोड़ रहा है फिर भी वह रुकता है क्योंकि छोड़ने का दर्द सहने से भी बड़ा लगता है। लोगों को लगता है कि जो चला गया, वो गलत था। पर सच यह है कि कभी-कभी जाना गलत नहीं होता खुद को बचाने का आखिरी तरीका होता है। हर बार रुकना वफादारी नहीं होता कभी-कभी रुकना खुद के साथ अन्याय होता है। उस दिन रिश्ता खत्म नहीं होता बस उसका असर खत्म हो जाता है। लोगों को लगता है कि जो कम बोलता है उसे समझाना आसान है। पर सच यह है जो कम बोलते हैं वो बहुत पहले समझ चुके होते हैं कि हर बात समझाना जरूरी नहीं होता। उन्होंने कोशिश की होती है कई बार की होती है और फिर एक दिन उन्होंने कोशिश करना ही छोड़ दिया होता है। लोगों को लगता है कि समय सब ठीक कर देता है। पर सच यह है समय कुछ ठीक नहीं करता वह बस हमें सिखा देता है कि अधूरेपन के साथ वैâसे जीना है। कुछ चीजें कभी पूरी नहीं होतीं बस उनकी कमी के साथ हम खुद को ढाल लेते हैं। लोगों को लगता है कि जो मजबूत है उसे किसी की जरूरत नहीं होती। पर सच यह है कि सबसे ज्यादा मजबूत वही लोग होते हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा साथ की जरूरत होती है पर वे मांगते नहीं। लोगों को लगता है कि जो चला गया उसे फर्क नहीं पड़ा। पर सच यह है कुछ लोग जाते वक्त टूटते हैं बस आवाज नहीं करते।

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