मुख्यपृष्ठस्तंभपॉलिटिका : मार्गदर्शक मंडल ध्वस्त, मोदी मार्ग का उद्घोष

पॉलिटिका : मार्गदर्शक मंडल ध्वस्त, मोदी मार्ग का उद्घोष

के.पी. मलिक

भाजपा का मार्गदर्शक मंडल, जो २०१४ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ७५ वर्ष से अधिक आयु के नेताओं को सक्रिय राजनीति से बाहर करने के लिए बनाया गया था, का उद्देश्य वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करना था। संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि ७५ वर्ष की आयु के बाद पद त्यागने का कोई नियम नहीं है और यह कि संघ और मोदी के बीच नई रणनीति बन चुकी है। अब मार्गदर्शक मंडल का अस्तित्व समाप्त हो गया है और मोदी के लिए ‘मोदी मार्ग’ प्रशस्त है।
मोदी का ब्रह्मास्त्र!
भाजपा में मार्गदर्शक मंडल कोई औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी का मौखिक आदेश था। २०१४ में सत्ता संभालते ही मोदी ने ७५ वर्ष से ऊपर के नेताओं को सक्रिय राजनीति से बाहर करने का फरमान लागू किया और लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, सुमित्रा महाजन, शांता कुमार, अरुण शौरी, कलराज मिश्र, जनरल वी.सी. खंडूरी, विजय कुमार मल्होत्रा और मदनलाल खुराना जैसे दिग्गजों को ‘मार्गदर्शक मंडल’ की चहारदीवारी में वैâद कर दिया गया। या यूं कहें कि मोदी का मार्गदर्शक मंडल कोई विचार का मंच नहीं, बल्कि मोदी द्वारा निर्मित भाजपा का ‘पॉलिटिकल ओल्ड-एज होम’ था? क्योंकि बस मोदी का एक मौखिक हुक्म कि ‘७५ पार? सत्ता से बाहर!’ इसीलिए गद्दी संभालते ही इस फरमान ने भाजपा के तमाम बुज़ुर्ग शेरों को पिंजरे में वैâद कर दिया।
दरअसल, यह मंडल ‘मार्गदर्शन’ से अधिक ‘मार्ग अवरोध’ हटाने का हथियार था। भाजपा के सारे वरिष्ठ नेता धीरे-धीरे किनारे कर दिए गए और मोदी मार्ग का निर्माण हो गया। कुछ माह पूर्व संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर के एक कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे मोरोपंत पिंगले के ७५ वर्ष के वक्तव्य के विषय में बताते हुए कहा कि मोरोपंत पिंगले के जीवन पर आधारित अंग्रेजी बुक के विमोचन के अवसर पर वृंदावन में आयोजित संघ की एक बैठक में मोरोपंत पिंगले को उनके ७५ वर्ष का होने पर सम्मानित करने का निर्णय लिया गया था।
डील फाइनल!
उस समय तत्कालीन सरकार्यवाह शेषाद्रि ने मोरोपंत को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तो उस समय मोरोपंत ने कहा था कि मैं ७५ का अर्थ समझता हूं। मोहन भागवत ने मोरोपंत को याद करते हुए कहा कि ये उनकी एक सीख है, मोरोपंत पिंगले ने संघ में बिना किसी प्रचार के काम करने और पचहत्तर वर्ष के बाद संन्यास लेने की सीख दी थी। यहां पिंगलें का उदाहरण देकर संघ प्रमुख ने सवाल उठा दिया था कि यह तीर मोदी की तरफ छोड़ा गया था? लेकिन विज्ञान भवन में अपने ही बयान से पलटकर भागवत ने स्पष्ट कर दिया कि ७५ वर्ष पर पद त्यागने का कोई नियम नहीं है। यानी संघ और मोदी के बीच अब नई रणनीति बन चुकी है।
दरअसल, दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ७५ पार वालों को पद त्यागने की सीख दी। सवाल उठा कि क्या यह नोक-झोंक सीधे मोदी के लिए थी? लेकिन विज्ञान भवन में जाकर भागवत पलट गए और साफ कह दिया कि ‘कोई नियम नहीं है।’ संदेश साफ था कि संघ और मोदी में डील फाइनल हो चुकी है। नतीजा साफ है कि मोदी ७५ वर्ष पार करने के बाद भी सत्ता से बाहर नहीं होंगे।
जाहिर है कि ‘मार्गदर्शक मंडल’ जिस मौखिक आदेश पर बना था, उसी आदेश से अब उसका अंतिम संस्कार हो चुका है यानी मार्गदर्शक मंडल मौखिक आदेश भी आखिर जुमला ही साबित हुआ यानी अब ७५ की उम्र में न कोई टिकट कटेगा, न सत्ता से निकाला जाएगा। मार्गदर्शक मंडल का तांत्रिक यज्ञ खत्म हो चुका है और उसकी राख पर केवल एक ही रास्ता बचा है, जिसका नाम है ‘मोदी मार्ग’।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

अन्य समाचार