मुख्यपृष्ठस्तंभसियासी सरगोशियां : बुलडोजर की छुट्टी

सियासी सरगोशियां : बुलडोजर की छुट्टी

ईश्वरी राज

यूपी में ‘परीक्षा वाले चचा’ का बुलडोजर इस हफ्ते गैराज में है, क्योंकि संभल के १३ सेंटर पर मोबाइल-जैमर लगाकर असली इम्तिहान चल रहा है। ‘साइकिल बाबू’ कह रहे हैं कि पेपर नहीं, सरकार का नेटवर्क लीक हो रहा है। लखनऊ में ४० डिग्री की ‘लू’ के बीच ‘हाथी वाली बुआ’ ट्वीट-ट्वीट खेल रही हैं। बोलती हैं कि गर्मी में सिर्फ बयान की हवा चल रही है, विकास का पंखा बंद है। ‘बाबा जी’ मुस्कुरा कर बोले कि आंधी ७० किमी की आएगी, पर विपक्ष उड़ेगा पहले।
कुर्सी-कुश्ती में आंधी-तूफान
बिहार में ‘पलटी-मार दादा’ फिर से पाला बदलने का वॉर्म-अप कर रहे हैं। मौसम विभाग ने बिहार में आंधी का अलर्ट दिया, ‘लालटेन परिवार’ बोला कि असली तूफान तो गठबंधन में आएगा। ‘सुशासन वाले भैया’ चुप हैं, क्योंकि भागलपुर में बिजली गिरी तो सियासी करंट भी वीक हो गया। ‘तेज लड़का’ कह रहा है कि नौकरी दो, नहीं तो जून की लू वोट जला देगी।
सियासत में फिसलन
उत्तराखंड में ‘पहाड़ी प्रधान’ ७-१३ जून की बारिश में भीगे-भीगे पुल ढूंढ रहे हैं। ‘हरीश वाले ताऊ’ बोले कि सड़कें बह गर्इं, पर वादे तैर रहे हैं। चारधाम में ‘वीआईपी दर्शन’ की लाइन पर विपक्ष का ताना है कि बादल फटते हैं, प्रोटोकॉल नहीं। ‘धामी बॉस’ रेनकोट पहनकर कह रहे हैं कि आपदा में अवसर ढूंढो।
कांग्रेस की हिचकी
एमपी में ‘मामा जी’ चुनावी कड़ाही चढ़ा चुके हैं। छिंदवाड़ा-मंडला में पहले चरण की गिनती शुरू है। ‘कमल वाले युवा’ बोल रहे हैं कि २९ में से २८ तो पिछली बार ले गए, इस बार १ पर भी आंधी का खतरा है। भोपाल में ७० किमी की हवा से ८० पेड़ गिरे, ‘कांग्रेसी चाचा’ बोले कि सत्ता का पेड़ भी हिल रहा है। ‘कक्का जी’ लड्डू बांट रहे हैं कि बारिश आएगी तो वोट भीगेंगे।
लू में सियासी पारा हाई
राजस्थान में ‘जादूगर साहब’ और ‘राजे मैडम’ की शतरंज में प्यादे फिर गर्मी खा रहे हैं। श्रीगंगानगर में ओले गिरे, जयपुर में ४ फ्लाइट डायवर्ट। ‘गर्मी वाले बाबा’ ८-११ जून तक लू का अलर्ट देकर गए, पर सियासी पारा ५० पार है। ‘पायलट कप्तान’ बादलों के बीच रास्ता देख रहे हैं, पूछ रहे हैं कि दिल्ली का मौसम कब साफ होगा। ‘गहलोत चाचा’ कह रहे हैं कि योजनाएं चल रही हैं, बस कुर्सी की उड़ान बाकी है।
कुल जमा: मानसून से पहले पांचों राज्यों में सियासी बवंडर ७० किमी की स्पीड से चल रहा है। छतरी सबने खोल रखी है, भीगेंगे तो सिर्फ वादे। जनता छांव ढूंढ रही है, नेता हवा का रुख।

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