ईश्वरी राज
जनगणना की बांसुरी…
उत्तर प्रदेश में कमल दल के सूबेदार ने जून से अगस्त तक हर जिले की परिक्रमा का एलान कर दिया है। सांसद-विधायकों को घर-घर का हाल बताना पड़ेगा। साइकिल वाले चाचा-भतीजे को फिर से साधने में लगे हैं, पर हाथी वाली बहनजी अभी भी मौन व्रत पर हैं। घोसी, दुद्धी, फरीदपुर की कुर्सियां छह महीने से खाली पड़ी हैं और चुनाव आयोग भी चुप्पी साधे बैठा है। पंचायत के ढोल अक्टूबर में बज सकते हैं, पर जनगणना की बांसुरी फरवरी में बजेगी। मतलब विधानसभा का शंख भी तभी पंâूका जाएगा।
बूढ़े शेर नाराज…!
उत्तराखंड में पहाड़ के सीएम साहब का नाम दिल्ली दरबार में बार-बार गूंज रहा है। वजह है चारधाम यात्रा में भीड़ और आपदा प्रबंधन की वाहवाही। पर संगठन वाले बूढ़े शेर नाराज हैं कि नौजवानों को ज्यादा भाव मिल रहा है। कांग्रेस में हरीश वाले दादा फिर सक्रिय पर आपस में ही गुटबाजी की बर्फ जमी है।
बिटिया रानी की चेतावनी
बिहार में लालू कुनबे की सुरक्षा कटौती पर बिटिया रानी ने बड़े भाई वाले मुख्यमंत्री को चेतावनी दे डाली। कुर्सी वाले चाचा की पार्टी में अब पोस्टर पर वही पुराने चेहरे नए चेहरों को जगह नहीं। दिल्लीवाले शाह ने इशारा कर दिया कि अगली बार गठबंधन की लगाम कस के पकड़ेंगे।
कमल दल में रस्साकशी
मध्य प्रदेश में मामा जी की कुर्सी तो सलामत है, पर कमलनाथ वाले दादा अब सियासी वनवास में हैं। दिल्ली से आए नए इंचार्ज ने विधायकों की क्लास लेनी शुरू कर दी है। उधर, कमल दल के अंदर ही सिंधिया समर्थक और शिव समर्थक खेमों में रस्साकशी चल रही है। आनेवाले निगम चुनाव में टिकट का गणित इसी से तय होगा।
मैडम की चुप्पी…!
राजस्थान में हाथ वाले दल ने वोटर लिस्ट वाले मुद्दे पर पलटी मार ली। पहले भगवा दल पर आरोप अब उसी एसआईआर को हथियार बनाकर भजनलाल सरकार को घेर रहे हैं। दोनों युवा सिपहसालार मूंछ वाले और कुर्ता वाले अब एक मंच पर दिख रहे हैं। भगवा खेमे में वसुंधरा वाली मैडम की चुप्पी सबसे बड़ा शोर है। दिल्ली वाले आलाकमान असमंजस में कि ऊंट किस करवट बैठेगा। कुल मिलाकर पांचों राज्यों में कुर्सी का खेल जारी है। कोई परिक्रमा पर, कोई पलटी पर, कोई चुप्पी पर। जनता देख रही है २०२७ दूर नहीं।
