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प्रोजेक्ट पड़ताल : मल्टी-मॉडल टनल निर्माण, ट्रैफिक होगी `मटियामेट’! … सड़कों के जाम में फंसेंगे मुंबईकर

ब्रिजेश पाठक
मल्टी-मॉडल टनल कनेक्टिविटी का उद्देश्य शहरभर में ट्रैफिक की भीड़ को कम करना और मुंबई महानगर क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। इस `मल्टी-मॉडल’ योजना के तहत मुंबई महानगर में ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की एक नई परत सुरंगों के रूप में जोड़ी जाएगी। ट्रैफिक स्टडी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर विभिन्न व्यास (डायमीटर) और लंबाई की सुरंगें बनाई जाएंगी। लेकिन मनपा सूत्रों का कहना है कि शहर में पहले से ही कई परियोजना का निर्माणकार्य जारी है, ऐसे में इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होने से शहर में ट्रैफिक जाम बढ़ सकता है।
प्रोजेक्ट की निविदा पहली बार फरवरी २०२४ में जारी की गई थी, ताकि परियोजना के लिए एक सलाहकार नियुक्त कर एक मास्टर प्लान तैयार किया जा सके। हालांकि, पिछले एक साल में इस निविदा को कोई ठोस प्रतिसाद नहीं मिला, जिससे यह मुंबई मनपा की सबसे लंबे समय तक खुली रहने वाली निविदाओं में से एक बन गई है। अब एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद जुलाई २०२५ में मनपा ने इस निविदा को फिर से कुछ संशोधित प्रावधानों के साथ जारी किया है।
कुल लागत रु. ४,३९२ करोड़
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत ४,३९२ करोड़ रुपए आंकी गई है, जिसमें हर ६ किलोमीटर की सुरंग की लागत लगभग ७३२ करोड़ रुपए होगी। अभी हाल में ही करीब दो अंतर्राष्ट्रीय सलाहकारों ने मनपा की ४,३९२ करोड़ रुपए की मल्टी-मॉडल टनल कनेक्टिविटी परियोजना के रोडमैप को डिजाइन करने में रुचि दिखाई है।
महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक
मनपा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस परियोजना का दायरा बहुत बड़ा है और यह मनपा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। हमने फरवरी २०२४ में एक निविदा जारी की थी। जुलाई तक दो अंतर्राष्ट्रीय सलाहकारों ने परियोजना पर काम करने में रुचि दिखाई है। अधिकारियों के अनुसार, सलाहकारों को ट्रैफिक अध्ययन करना, परियोजना की सुरंग नेटवर्क के लेआउट का डिजाइन तैयार करना होगा।
परियोजना का दायरा विस्तृत
एक अधिकारी ने बताया, ‘परियोजना का दायरा काफी विस्तृत है। पहले चरण में सुरंगों की योजना कुछ ही क्षेत्रों में बनाई जाएगी। नेटवर्क का रोडमैप तैयार करने के लिए सलाहकारों को उच्च ट्रैफिक जोन का अध्ययन, स्थानों की पहचान और डिजाइन तैयार करने का कार्य सौंपा जाएगा।’
बोली प्रक्रिया में तकनीकी जटिलताएं
हालांकि, यह निविदा पहली बार फरवरी २०२४ में जारी की गई थी, लेकिन पर्याप्त बोलीदाताओं के न मिलने के कारण यह प्रक्रिया ठप पड़ी रही। जब देरी को लेकर अधिकारियों से सवाल किए गए तो उन्होंने कार्य के व्यापक दायरे और बोली प्रक्रिया में तकनीकी जटिलताओं को इसका कारण बताया।

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