अरुण कुमार गुप्ता
कहते हैं भाई जैसा हित नहीं और भाई जैसा मुद्दई नहीं। वर्तमान में यह कहावत राणे बंधुओं यानी निलेश राणे और नितेश राणे पर सटीक बैठती है। हम बात कर रहे हैं कोंकण की राजनीति का। वैसे तो यह क्षेत्र पिता नारायण राणे का गढ़ माना जाता है, लेकिन सियासत ने करवट बदली तो एक भाई भाजपा से और दूसरा भाई शिंदे गुट की डोर पकड़ लिया। यहां तक तो बात ठीक है। अब बात करते हैं दोनों दलों की आपसी टांग खिंचाई की, तो इसमें कोई पीछे नहीं रहना चाहता है। दोनों दलों के नेता सत्ता में भागीदार होने के बावजूद एक-दूसरे पर जमकर कीचड़ उछाल रहे हैं। हालिया मुद्दा स्टिंग ऑपरेशन का है। मालवण में हुए स्टिंग ऑपरेशन ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। शिंदे गुट से जुड़े निलेश राणे एक स्टिंग ऑपरेशन करते हुए भाजपाई विजय किनवडेकर के घर पहुंच गए। इस दौरान निलेश राणे को विजय किनवडेकर के घर पर गैर-कानूनी और बेहिसाबी २५ लाख रुपए मिले। एक कमरे में हरे रंग के बैग में ये पैसे मिले। इस बीच निलेश राणे ने आरोप लगाते हुए कहा कि रवींद्र चव्हाण मालवण आए और चले गए। कल से ही तेजी से पैसे बांटने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद निलेश राणे के आरोपों पर जवाब देने के लिए मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे मोर्चा संभालते हुए मैदान में उतर पड़े। नितेश राणे ने कहा कि रवींद्र चव्हाण भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं इसलिए उन्हें हर जिले के हर कोने में जाना पड़ता है। कल अगर हमने मंत्री उदय सामंत के बारे में बात की और ऐसा हंगामा मचाया तो? हमारे अपने व्यवसाय भी होते हैं। अगर अपने व्यवसाय के लिए घर में पैसे रखे तो इसमें गलत क्या है? जो नियम हम पर लागू होता है, वही नियम सब पर लागू होगा क्योंकि ‘हमाम में सब नंगे हैं’। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इसमें आगे कौन अपने बयान पर अडिग रहता है या फिर यह सब एक ड्रामा बनकर रह जाता है, जो सिर्फ आम जनता को मूर्ख बनाने के लिए तैयार किया गया है।
चव्हाण का नंबर गेम!
राजनीति हो या अंक गणित दोनों में अंक यानी नंबर का दोनों जगह महत्व है। अंक बराबर न हो तो पूरा गणित गड़बड़ा जाता है। नंबर के खेल से सत्ता बन भी जाती है और बिगड़ भी जाती है, लेकिन हमारे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण हैं कि समझते ही नहीं हैं। उन्होंने जो दो नंबर वाली थ्योरी गढ़ी है उससे राजनीति में बवंडर उठ खड़ा हुआ है। उनका इशारा सीधे अजीत गुट से जोड़ कर देखा जा रहा है। यहां बताते चलें कि सातारा की एक सभा में चव्हाण ने कहा कि जो भी हैं देवाभाऊ हैं। नंबर दो की कोई औकात नहीं होती। जब चव्हाण के इस बयान पर बवाल मचा तो उन्होंने अपना बचाव करते हुए २०१४ में आर.आर. पाटील के भाषण की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि आबा ने कहा था, मैंने सालों सत्ता में काम किया, बड़े पद संभाले। मैं नंबर एक बनने की कोशिश करता रहा, पर नहीं बन पाया और नंबर दो को राजनीति में कोई कीमत नहीं मिलती। नंबर एक, नंबर एक ही रहता है। यह उनका वाक्य नहीं, बल्कि आर.आर. पाटील का कथन है, जिसका वीडियो अक्सर वायरल होता रहता है, लेकिन उनके इस बयान से महायुति में फिर तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, चव्हाण के बयान ने एक बात तो साफ कर दी है कि महायुति में अंदरखाने काफी हलचल चल रही है। यह हलचल भविष्य में विस्फोटक रूप भी ले सकती है। उधर राजनीति के जानकारों का मानना है कि दो नंबर यानी अजीत गुट को समय-समय पर सिर्फ बयानों के जरिए झटके देते रहने की बात भर है।
सत्तार की साफगोई!
वर्तमान समय की राजनीति में विरले नेता ही मिलेंगे, जो अपनी बात साफगोई से सबके सामने रखें। आज राजनीति में ऐसे नेताओं का पदार्पण हो गया है कि पूरा माल अकेले गटक जाने के बाद डकार तक नहीं लेते हैं। यानी पूरी तरह से अकेले हजम कर जाते हैं। ऐसे दौर में भी मंत्री अब्दुल सत्तार जैसे नेता हैं जो सबके सामने मनी पॉलिटिक्स की खुलकर वकालत कर रहे हैं। हालांकि, यदि यह कहा जाए कि वर्तमान राजनीति मनी की ही है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि चारों ओर पैसे का बोलबाला देखा जा सकता है। बात चाहे वोटरों को लुभाने की हो या सत्ता की जोड़-तोड़ जमकर पैसे का खेल चल रहा है। ऐसे में यदि मंत्री अब्दुल सत्तार ने ‘पैसे मिले तो मेवा और काजू-किशमिश समझकर खा लो’ कह ही दिया तो कोई बड़ी बात नहीं है। हुआ यूं कि सिल्लोड नगर परिषद क्षेत्र में भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अब्दुल सत्तार के समर्थक वार्ड की सूचियां लेकर मतदाताओं को नकद राशि बांटते पकड़े गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने ‘लक्ष्मी दर्शन’ बताते हुए इसे चुनावी आचार संहिता का खुला उल्लंघन कहा। ठीक इसी समय अंबड की एक सभा में सत्तार ने चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि जो लोग पैसे बांटेंगे, उन्हें काजू-किशमिश समझकर खा लेना। वो पैसे जनता के हैं, उनके बाप-दादाओं के नहीं। यह बयान सोशल मीडिया पर जैसे ही वायरल हुआ, विपक्ष ने इसे सत्ता की हदों को पार करनेवाला बयान बताते हुए जोरदार आक्रमण शुरू कर दिया है। विपक्ष के वार के बाद लगता है सत्तार ने पतली गली पकड़ ली है, क्योंकि अभी तक उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
