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मुंबई में रावण को डुबाना है…दिल्ली के रावण को जलाना है!..संजय राऊत का हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

आज रावण का अंत करना है। हमेशा रावण का दहन होता है। अब इस बारिश में रावण का दहन वैâसे करना है? रावण को जलाना है या रावण को डुबाना है? यह विचार करना पड़ेगा। मुंबई में बारिश है इसलिए मुंबई में रावण को डुबाना है और दिल्ली के रावण को जलाना है। इस तरह का जोरदार प्रहार संजय राऊत ने अपने तूफानी भाषण में किया।
शिवसेना का शिवतीर्थ पर दशहरा सम्मेलन भारी बारिश में उत्साह के साथ मनाया गया। उन्होंने कहा कि हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे का आज हम पर ध्यान है। ६८ साल पहले शिवसेनाप्रमुख ने शिवसेना की जो चिंगारी लगाई थी, उसका यह धधकता हुआ दावाग्नि मूसलाधार बारिश में भी बुझ नहीं सकता है। यह पूरा देश देख रहा है। अब तक नेताओं के भाषण होते थे और फिर बारिश होती थी। यहां बारिश और तूफान होते हुए भी यह सम्मेलन हम कर रहे हैं और हजारों की संख्या में हम यहां जमा हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह शिवतीर्थ है और यह शिवतीर्थ सिर्फ हमारी शिवसेना का है। इस शिवतीर्थ के आगे और एक शिवतीर्थ है, उसे भी अपना मानना चाहिए।
शिवसेना को झटका दिए तो खुद ही हो जाएंगे खत्म
हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख ने जिस शिवसेना की स्थापना इस शिवतीर्थ पर की, उस शिवसेना का दशहरा सम्मेलन इस महाराष्ट्र की परंपरा है। मराठी माणुस की मजबूत एकजुटता जो शिवसेनाप्रमुख ने बनाई, उस शिवसेना को झटका देने का प्रयास कोई कितना भी करेगा, तो उसमें वह खुद ही खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज कई लोगों ने सवाल पूछे, कई ने संदेह जताया कि शिवतीर्थ पर कीचड़ हो गया है, यानी आप कीचड़ फेंकने वाले हैं? मैंने कहा, हां। गद्दारों पर कीचड़ ही फेंकने वाले हैं, उनकी वही औकात है।
…तो बुरा मानने का नहीं है कोई कारण
संजय राऊत ने कहा कि पूरा महाराष्ट्र अत्यधिक वर्षा से ग्रस्त है। मराठवाड़ा पूरा पानी और कीचड़ में है। आठ-आठ दिन किसान कीचड़ में है, हम दो घंटे पानी और कीचड़ में यह सभा कर लें तो हमें बुरा मानने का कोई कारण नहीं है। महाराष्ट्र अत्यधिक वर्षा ग्रस्त है, तो यह हमारा वर्षा ग्रस्त दशहरा सम्मेलन है।

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