मुख्यपृष्ठस्तंभरीडर्स डायरी: स्विट्जरलैंड में फेल `रोमांस'...!

रीडर्स डायरी: स्विट्जरलैंड में फेल `रोमांस’…!

राम-राम भाइयों! जरा खाट पर ठीक से जम जाओ और सुनो मिडिल ईस्ट की इस पंचायत का बिल्कुल ताजा और कड़क अपडेट। जून के इस तपते और बरसते माह में वहां राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। हुआ ये कि अमेरिका और ईरान, जो जनम-जनम के बैरी हैं, चुपके से स्विट्जरलैंड के ठंडे पहाड़ों बुर्गनस्टॉक में जा बैठे। दोनों में ऐसा याराना जागा कि बैठकर शांति समझौते की जलेबी छानने लगे। तय हुआ कि पुरानी दुश्मनी खत्म, होर्मुज का रास्ता चालू और लेबनान की मार-काट पर फुलस्टॉप लगेगा। पूरी दुनिया अभी इस नए `याराने’ पर ताली बजा ही रही थी कि बीच में चौधरी' बनकर कूद पड़ा इजरायल! उसने आव देखा न ताव, लेबनान पर दनादन बम बरसा कर खेल बिगाड़ दिया। उनके एक गरम-मिजाज मंत्री बोले कि पूरा लेबनान फूंक दो। इस रायते की असली वजह एक कन्फ्यूजन थी। मध्यस्थता करने वाला पाकिस्तान कह रहा था कि लेबनान भी इस शांति-शांति वाले खेल का हिस्सा है, पर अमेरिका के बड़े साहब कह गए कि इजरायल हमारी नहीं सुनेगा। बस, इजरायल को यही कानूनी ढील चाहिए थी, उसने कसर पूरी कर दी। लेकिन नया मोड़ ये है कि खेल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, पर्दे के पीछे की खिचड़ी अभी भी पक रही है। अब असली मजा ये है कि अमेरिका के बड़े चौधरी जो पहले इजरायल की पीठ थपथपाते थे, अब वो भी सरेआम खिसियाए घूम रहे हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तो इजरायल की इस छटपटाहट को खुलेआम फ्रिकआउट’ (बौखलाहट) कह दिया है। ऊपर से डोनाल्ड ट्रंप ने भी बड़ा बम फोड़ा है कि इजरायल बेटा, अब अपनी सुरक्षा खुद संभालो, हमेशा अमेरिका का मुफ्त वीआईपी पास नहीं मिलेगा। तो भाई, चौपाल की आखिरी बात ये है कि जब तक वॉशिंगटन वाले इजरायल की नाक में कड़ी नकेल नहीं कसेंगे, तब तक ये ठंडे पहाड़ों वाली शांति की बातें जमीन पर आते ही बारूद में स्वाहा होती रहेंगी!

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