राजेश सरकार | प्रयागराज
प्रयागराज में गुरुवार को सड़क सुरक्षा, गड्ढामुक्ति और निर्माण कार्यों को लेकर एक बार फिर कमिश्नरी के अफसरों और जनप्रतिनिधियों की लंबी बैठक हुई। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह की मौजूदगी में संगम सभागार में योजनाओं, प्रस्तावों और प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सांसद प्रतिनिधि, विधायक, पीडब्ल्यूडी और ब्रिज कॉरपोरेशन के अधिकारी भी शामिल रहे।
बैठक में वही पुराने निर्देश दोहराए गए कि सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए, क्षतिग्रस्त पटरियों की मरम्मत हो, झाड़ियां काटी जाएं, चौड़ीकरण कार्य तेज किया जाए और जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाए। कागजों पर विकास की तस्वीर एक बार फिर सजाई गई और योजनाओं की प्रगति को संतोषजनक बताया गया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रयागराज की टूटी सड़कें केवल बैठकों तक ही सीमित रह गई हैं? शहर से लेकर गांव तक सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है। कहीं गड्ढों में वाहन फंस रहे हैं तो कहीं टूटी पटरियां रोजाना हादसों को न्योता दे रही हैं। बरसात से पहले हर साल ऐसे ही दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली बारिश आते ही विकास कार्यों की पोल खुल जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अफसरों की बैठकों और जमीन पर दिखने वाले काम में बड़ा अंतर है। सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकों में हादसों पर चिंता जताई जाती है, लेकिन उन्हीं सड़कों की मरम्मत महीनों तक नहीं होती जहां रोज लोग घायल हो रहे हैं।
फाइलों में योजनाएं तेजी से आगे बढ़ती हैं, जबकि जमीन पर जनता धूल, कीचड़ और गड्ढों से जूझती रहती है। लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस और दिखाई देने वाला काम चाहिए। क्योंकि विकास की असली तस्वीर मीटिंग हॉल में नहीं, बल्कि सड़कों की हालत से तय होती है।
