-सप्तमी को मां कालरात्रि और महाअष्टमी को महागौरी की पूजा; भयमुक्ति, पवित्रता और आत्मबल की आराधना
नवरात्रि का सातवां और आठवां दिन साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सप्तमी को मां कालरात्रि और अष्टमी को मां महागौरी की पूजा होती है। मां कालरात्रि का उग्र स्वरूप नकारात्मकता और भय के नाश का प्रतीक है, जबकि मां महागौरी शांति, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतिनिधित्व करती हैं।
सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा
मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं। उनका वर्ण अंधकार के समान काला, केश बिखरे हुए और तीन नेत्र बताए गए हैं। उनका वाहन गर्दभ है। स्वरूप उग्र होने के बावजूद वे भक्तों को शुभ फल देती हैं, इसलिए उन्हें ङशुभंकरीङ भी कहा जाता है।
पूजा-विधि
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा-स्थान पर दीपक जलाकर मां कालरात्रि का ध्यान करें। देवी को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। गुड़ अथवा उससे बने पकवान का भोग लगाया जा सकता है।
मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
ध्यान मंत्र:
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा से भय, शत्रु-बाधा और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। आध्यात्मिक रूप से यह साधना अपने भीतर के क्रोध, अहंकार और अज्ञान पर विजय पाने की प्रेरणा देती है।
महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा
मां महागौरी नवदुर्गा का आठवां स्वरूप हैं। उनका वर्ण अत्यंत गौर और वस्त्र श्वेत हैं। वे वृषभ पर विराजमान हैं। उनके चार हाथों में त्रिशूल, डमरू, अभय और वर मुद्रा सुशोभित हैं।
पूजा-विधि
अष्टमी के दिन देवी को स्नान, वस्त्र, चंदन, कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। सफेद या लाल पुष्प चढ़ाए जा सकते हैं। नारियल अथवा उससे बने व्यंजन का भोग लगाया जाता है।
मंत्र:
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
ध्यान मंत्र:
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
मां महागौरी की आराधना मन की शुद्धि, वैवाहिक सुख, सौभाग्य और पारिवारिक शांति प्रदान करने वाली मानी जाती है।
अष्टमी पर कन्या पूजन
अनेक परिवारों में महाअष्टमी को कन्या पूजन किया जाता है। दो से दस वर्ष की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें। उनके चरण धोकर तिलक लगाएं और हलवा, पूड़ी तथा चने का भोजन कराएं। यथाशक्ति फल, वस्त्र या दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।
किसी कन्या को उसकी इच्छा के विरुद्ध पूजा या भोजन के लिए बाध्य न करें। कन्या पूजन की वास्तविक सार्थकता बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर देने में है।
साधना का संदेश
सप्तमी और अष्टमी की संयुक्त साधना जीवन के दो पक्षों को सामने रखती है—पहले अपने भीतर के भय एवं अंधकार का नाश और फिर मन की पवित्रता एवं शांति की प्राप्ति। यही कालरात्रि से महागौरी तक की आध्यात्मिक यात्रा है।
