मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति पर भड़के साधु-संत ... पेड़ों का कत्ल करके कुंभ स्नान करना...

महायुति पर भड़के साधु-संत … पेड़ों का कत्ल करके कुंभ स्नान करना पाप!

मेले की आड़ में सरकार न चलाए अपना एजेंडा
सामना संवाददाता / मुंबई
नासिक में कुंभ मेले के नाम पर तपोवन के १,८०० पेड़ काटे जाने के प्रस्ताव ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। महायुति की सरकार में कुंभ मंत्री गिरीश महाजन के अड़ियल पैâसले पर अब साधु-संत भी आगबबूला हो गए हैं। उनका कहना है कि ‘पेड़ों का कत्ल करके कुंभ स्नान करना पाप’ के समान है और यह किसी भी धर्मशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है। शंकराचार्य सहित कई धर्मगुरुओं ने सरकार पर ‘मेले की आड़ में अपना एजेंडा’ चलाने का आरोप लगाते हुए सख्त विरोध जताया है। उन्हें आशंका है कि मेला समाप्त होने के बाद इस भूमि का दुरुपयोग हो सकता है।
साधु ग्राम में पेड़ काटे जाने का राजनीतिक दलों और पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध किया है। अभिनेता सयाजी शिंदे की उपस्थिति में आंदोलन हुआ। कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन को वृक्ष कटाई से रोकने का प्रयास हुआ। शिवसेना, मनसे सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया है। राजनीतिक नेताओं का आंदोलन जोरों पर है। अब इसमें शंकराचार्य और साधुओं ने भी कूदने की ठानी है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मसले पर सरकार को सख्त लहजे में लताड़ लगाई है। पेड़ काटकर कुंभ मेला मनाना किस सिद्धांत में फिट बैठता है? कौन से साधु पेड़ काटकर स्नान करना पसंद करेंगे? किस धर्म में ये बात कही गई है? उन्होंने ऐसे सवाल भी उठाए।

मकसद कुछ और है
शंकराचार्य ने वृक्ष कटाई पर सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए। कुंभ मेला सिर्फ एक बहाना है। राजनीतिक नेताओं का पेड़ काटने का मकसद कुछ और ही होगा। कुंभ मेला खत्म होने के बाद यह जमीन किसी योजना के लिए या सरकार के चहेते किसी व्यक्ति को दे दी जाएगी।
विरोध से बढ़ी मुश्किलें
राजनीतिक नेता, पर्यावरण प्रेमी और विभिन्न संगठन इस मुद्दे को उठा रहे हैं। रोज हो रहे आंदोलनों से प्रशासन दबाव में है। इसमें अब साधुओं के विरोध ने प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

अन्य समाचार