राजेश सरकार / प्रयागराज
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह का दीप जलाकर प्रारंभ किया। दीक्षांत समारोह में परास्नातक, स्नातक एवं व्यवसायिक शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 92,109 विद्यार्थिंयों को उपाधि प्रदान की गई। साथ ही विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 191 विधार्थिंयों को पदक प्रदान किए गए। इनमें 129 छात्राएं एवं 62 छात्रों ने पदक प्राप्त किए, जबकि लगभग 50 विद्यार्थी समारोह में देर से पहुंचने के कारण राज्यपाल से उपाधि प्राप्त नहीं कर सके। विद्यार्थियों का कहना था कि जाम में फंसे होने के कारण उनको समारोह में पहुंचने में देरी हो गई। समारोह पर्यंत इन 50 विद्यार्थियों को रोक रखा गया था। राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में उपाधियां, मेडल, प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्षो तक मेहनत की, जो सीखा, इसके लिए आपको यह डिग्री और अवार्ड प्राप्त हुए है। इसके लिए आपके माता-पिता सर्वप्रथम बधाई के पात्र हैं। उनका अभिनंदन करती हूं, क्योंकि बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ उनकी जिम्मेदारियां एवं कठिनाईयां भी बढ़ती जाती हैं। फिर भी बच्चों के सपनों को पूरा करने एवं आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहते है। कहा कि दीक्षांत समारोह में भी बेटियां मेडल व डिग्री प्राप्त करने में बेटों से आगे है। कहा कि नारी शक्ति भविष्य में भी इसी प्रकार आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारा समाज नारी शक्ति की तरफ बढ़ रहा है। आज का परिदृश्य बदल चुका है, आगे बढ़ने के लिए सबको कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। दुनिया भर में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ रही है, समस्याओं के समाधान करने का प्रयास हो रहा है और आज भारत पूरी दुनिया को मार्गदर्शन व नेतृत्व प्रदान कर रहा है। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री द्वारा तात्कालिक समय में असम राज्य में किए गए इथेनॉल संयंत्र कार्यों को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को नए शोध के आयाम एवं क्षेत्र को खोजने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को रिसर्च व पेंटेंट पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कहा कि संसाधनों का उपयोग जनकल्याण के लिए कैसे किया जा सकता है, इसके बारे में सोचना चाहिए। कहा कि हमें भारत में नया ताजमहल बनाने की आवश्यकता नहीं है, अपितु पूरे विश्व में भारत को ताजमहल की तरह चमकाना है। उन्होंने विद्यार्थिंयों में जोश भरते हुए कहा कि भारत युवाओं का देश है और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आने वाले 25 वर्ष आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि युवा संकल्प लें, तो दुनिया बदल सकती है। परंतु इसके लिए शिक्षा, समर्पण, देश के विकास की भावना, देशभक्ति की आवश्कता होती है। जब तक हम यह अपने जीवन में नहीं उतारेंगे, तब तक राष्ट्र की सेवा हम नहीं कर सकते हैं। आप अपनी योग्यता, ज्ञान व सेवा को केवल अपने स्वयं व परिवार तक सीमित न रखकर राष्ट्रसेवा भाव से अपनी योग्यता को पूरे देश में प्रसारित करें, जिससे पूरे देश का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि चुनौतियों से आपका ज्ञान व आत्मविश्वास बढ़ेगा, आपके जीवन में कठिनाईयां आएंगी, इससे डरने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने लक्ष्य को तय कर कठिनाईयों से मार्ग प्रशस्त करते हुए योजना बनाकर आगे बढिए और उस लक्ष्य को प्राप्त करिए। कहा कि दीक्षांत समारोह प्रमाणपत्र, डिग्रियां एवं मेडल देने के साथ ही विद्यार्थियों को स्मरण भी कराता है कि अब आपकी जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसके भवनों, डिग्रियों से नहीं है, बल्कि उसके अनुशासन, शोधकार्य, सामाजिक चेतना और अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण में निहित होती है। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब विद्यार्थी गुरू के सानिध्य में बैठकर न केवल पाठ्य पुस्तक से, बल्कि उनके अनुभव और जीवनदर्शन से सीखते है। कहा कि अध्यापकों का यह दायित्व बनता है कि वे विद्यार्थिंयों के सानिध्य में बैठे और उनसे अच्छे संबंध बनाते हुए उन्हें सिखाने का कार्य करें।
राज्यपाल ने विद्यार्थिंयों से एक लक्ष्य निर्धारित कर उसी के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘‘मनुष्य को मनुष्य बनाया’’ इसी ध्येय वाक्य को आप आगे प्रसारित करें। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत्र ने दीक्षांत समारोह में मेडल व उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वविद्यालयों को शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों से भी ओतप्रोत बताते हुए संस्कारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को चरित्र का उत्प्रेरक होना चाहिए और संस्कारित ज्ञान होना अच्छा है। उन्होंने कहा कि हमें हर कार्य में उत्कृष्टता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि उत्कृष्टता की जितनी साधना करेंगे, उतना ही हमें सम्मान मिलेगा। कैबिनेट मंत्री उच्च शिक्षा विभाग योगेन्द्र उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में प्रोफेसर राजेंद्र सिंह के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन हम सब के लिए एक प्रेरणा स्रोत है और हमें आगे बढ़ने के लिए उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।उन्होंने कहा कि माता-पिता, गुरुओं के आशीर्वाद एवं सहयोग, श्रम के बिना विद्यार्थी मुकाम हासिल नहीं कर सकते। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन पर्यंत इसे याद रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उपाधियां मिली है, इसकी उपयोगिता समाज एवं राष्ट्र के लिए करें, यह लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस देश ने आपको बहुत कुछ दिया है, इसलिए हमेशा व्यक्तिगत हित राष्ट्रहित में सम्मिलित रहे। उन्होंने कहा कि स्वहित एक कालखंड तक जीवित रहता है लेकिन राष्ट्रहित अनादिकाल तक चलता है। राज्य मंत्री उच्च शिक्षा विभाग रजनी तिवारी ने अपने उद्बोधन में डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके माता-पिता शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र-छात्राओं की उपलब्धियों के उत्सव का दिन है। यह विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, त्याग और तपस्या का प्रतिफल है। देश और प्रदेश के निर्माण में आप इनका उपयोग करेंगे यह आपकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व मंच पर उभरती शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक सुधार सहित हर क्षेत्र में युवाओं के लिए संभावनाएं हैं। इस अवसर पर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भइया) विश्वविद्यालय के कुलपति अखिलेश कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा कि आज 739 कालेज इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है तथा 5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे है। उन्होंने कहा कि संकल्प, निष्ठा व सामूहिक प्रयास से राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा विश्वविद्यालय को ए ग्रेड प्रदान किया गया है, जो विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति, शोध संस्कृति, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाता है।
