सामना संवाददाता / मुंबई
लाडली बहन योजना में सरकारी घोटाले का मामला सामने आया है। विभिन्न सरकारी विभागों में सेवारत और सेवानिवृत्त महिलाओं ने योजना का पैसा हड़प लिया है। इन्होंने नियम तोड़कर लाभ तो ले लिया, लेकिन अब उनकी खिंचाई शुरू हो गई है। इसकी वजह से लगभग ८,००० सरकारी कर्मचारी और सेवानिवृत्त महिलाएं फंसी हैं। इन फर्जी लाभार्थियों से १५ करोड़ रुपए वसूलने की तैयारी महायुति सरकार की ओर से की गई है। पहले बिना कागजातों की जांच किए योजना का लाभार्थी बनाया और अब सरकार ने साफ किया है कि किसी को भी गैरकानूनी लाभ नहीं लेने दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दंड का करना पड़ेगा सामना
इसके अलावा दोषियों पर केवल वसूली ही नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। महाराष्ट्र दीवानी सेवा (आचरण, अनुशासन और अपील) नियम १९७९ के तहत संबंधित महिला कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है। सरकार इस मामले की जांच कर रहा है और अगले कुछ दिनों में दोषियों के खिलाफ कड़ा निर्णय लिया जाएगा। इस तरह इस योजना से अनुचित लाभ लेने वाली महिलाओं को निश्चित रूप से दंड का सामना करना पड़ेगा।
महिलाओं ने की जानबूझकर धांधली!
लाडली बहन योजना के तहत केवल उन महिलाओं को लाभ दिया जाता है, जिनकी वार्षिक आय २.५ लाख रुपए से कम हो। खास बात यह है कि कार्यरत सरकारी कर्मचारी या सेवानिवृत्त कर्मचारी इस योजना का लाभ नहीं ले सकते। इसके बावजूद कुछ महिलाओं ने जानबूझकर धांधली की। महिला व बाल कल्याण विभाग ने सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग की मदद से सभी ऐसे फर्जी लाभार्थियों की सूची तैयार की। इस सूची में जिला परिषद की कर्मचारी, शिक्षक, विभिन्न सरकारी विभागों की महिला कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हैं, जिनकी संख्या ८ हजार से अधिक पाई गई। महाराष्ट्र सरकार की लोकप्रिय लाडली बहन योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। इस योजना का उद्देश्य केवल जरूरतमंद, आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को आर्थिक मदद देना था, लेकिन वास्तविकता में कई सरकारी कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी कर इस योजना का लाभ उठाया। अब तक पता चला है कि गैरकानूनी रूप से लाभ लेनेवाली महिला कर्मचारियों की संख्या ८ हजार से अधिक है। इससे योजना की प्रामाणिकता पर सवाल उठे हैं और वास्तविक लाभार्थी महिलाओं के साथ अन्याय हुआ है।
कोई भी नहीं ले पाएगा गैरकानूनी लाभ
इस घोटाले के बाद वित्त विभाग ने तुरंत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है और संबंधित विभागों को लगभग १५ करोड़ रुपए वसूलने के आदेश दिए गए हैं। यह वसूली दोषी कर्मचारियों के वेतन या सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से किश्तों में या कुछ मामलों में एकमुश्त की जाएगी। इसके लिए वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और महिला व बाल कल्याण विभाग के बीच समन्वय किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी गैरकानूनी लाभ नहीं ले पाएगा।
