सुरेश मिश्र
इस समय सारी दुनिया में बसे बिहार वासी धूमधाम से छठ मइया के पूजन में लीन हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार ही नहीं मुंबई, कोलकाता, दिल्ली के साथ जहां भी बिहारी रहते हैं बड़ी श्रद्धा-भक्ति से इस महापर्व को मना रहे हैं। यह व्रत बहुत ही कठिन होता है। ३६ घंटे लगातार निर्जला रहकर व्रती व्रत करते हैं। मुंबई में रहनेवाली एक महिला के मन में उत्सुकता जागी तो उसने पड़ोस में रहनेवाली बिहार की महिला से पूछा कि आखिर यह महापर्व क्या है, वैâसे मनाया जाता है, इसका इतना अधिक महत्व क्यों है? तो व्रत रखनेवाली उस बिहारी महिला ने समझाया-
आवा चली घटवा पे, लागल बाटइ भिरिया
छठ मइया हमरी न
हरि लेइहैं सगरी पिरिया
छठ मइया हमरी न।
तन-मन-घर के पवित्र जाय करिहैं,
उठि के सबेरवा नहाय-खाय करिहैं
करिहौं अरघ, सूर्यदेव कइ डगरिया
छठ मइया हमरी न,
हरि लेइहैं सगरी पिरिया, छठ मइया हमरी न
रोटी अउर केरा क प्रसदवा बनाई हो
पूरा छत्तिस घंटा निरजला रहल जाई हो
संझवा बनावल जाई, गूड़वा क खिरिया
छठ मइया हमरी न
हरि लेइहैं सगरी पिरिया, छठ मइया हमरी न
खरना के बाद तीसरा दिवस आई हो
जप-तप सगरा विधान से कराई हो
बिना पानी डेढ़ दिन तलक तपे सरिरिया
छठ मइया हमरी न
हरि लेइहैं सगरी पिरिया, छठ मइया हमरी न
सुपवा में फल, गन्ना, ठेकुवा सुहाई हो
पूजा करिबै मंगिया म सेन्हुरा लगाई हो
डूबते सुरुज क पूजन करिहैं सगरी तिरिया
छठ मइया हमरी न
हरि लेइहैं सगरी पिरिया, छठ मइया हमरी न
चउथे दिनवां सूरजू से पहिले घाट जइहैं
दूध व प्रसाद से पुजनवां करइहैं
सूर्यदेव पे टिकल बा सृष्टि कइ नजरिया
छठ मइया हमरी न
हरि लेइहैं सगरी पिरिया, छठ मइया हमरी न
भक्ति-आस्था-तप क सगरी दुनिया में न सानी बा
डूबते क पूजा, एक मात्र ई निशानी बा
छठ पूजा जइसन जग म मिली न नजिरिया
छठ मइया हमरी न
हरि लेइहैं सगरी पिरिया, छठ मइया हमरी न
