सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदी विद्या प्रचार समिति द्वारा संचालित हिंदी हाई स्कूल के उप प्रधानाचार्य श्री अभय प्रताप सिंह अपनी 35 वर्ष की सेवा पूर्ण कर 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसी अवसर पर बुधवार 29 अप्रैल को विद्यालय के एम.पी.एस.एस. सभागार में भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र सिंह, निदेशिका डॉ. ऊषा मुकुंदन, प्रधानाचार्य श्री राजेन्द्र कुमार सिंह, आर.जे. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हिमांशु दावड़ा, पूर्व प्रधानाचार्य श्री आर.डी. सिंह, श्री एस.ए. पाल, श्री रमेश सिंह, श्री कप्तान सिंह, श्री शैलेन्द्र सिंह, आर.जे. कॉलेज घाटकोपर के वाइस प्रिंसिपल डॉ. यतिन राणे सहित अनेक गणमान्य शिक्षाविद उपस्थित रहे। इसके अलावा हिंदी विभाग के प्रो. डॉ. चंद्र प्रकाश सिंह, डॉ. संजय सिंह, डॉ. तेज बहादुर सिंह, के.एम.एस. जूनियर कॉलेज के सुपरवाइजर श्री संभाजी घोलप, लाला लाजपत राय कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल श्री प्रवीण फालके तथा झुनझुनवाला कॉलेज वाशी के प्रोफेसर भी मौजूद रहे।
समारोह में बीएमसी स्कूल के सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक श्री आनंद सिंह, श्री ज्ञानशंकर सिंह, श्री दिनेश सिंह सहित अन्य शिक्षाविदों ने भी उपस्थिति दर्ज कराई।
श्री अभय प्रताप सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद स्थित धनीपुर गांव के निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही हुई। इसके बाद उन्होंने तिलकधारी महाविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर तथा बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1990 में उन्होंने एम.ए. (भूगोल) में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसी वर्ष केंद्रीय विद्यालय रिहंद नगर में उनकी नियुक्ति हुई।
वर्ष 1991 में वे मुंबई के हिंदी हाई स्कूल में नियुक्त हुए, जहां उन्होंने हिंदी एवं भूगोल शिक्षक, एनसीसी ऑफिसर, रायफल क्लब निदेशक तथा उप प्रधानाचार्य के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही वर्ष 2001 से वे के.एम.एस. जूनियर कॉलेज में अंशकालिक प्रवक्ता (भूगोल) के रूप में भी कार्यरत रहे।
कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र सिंह ने उनका स्वागत किया। प्रधानाचार्य श्री राजेन्द्र कुमार सिंह ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। वहीं 61 महाराष्ट्र बटालियन एनसीसी के ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट कर्नल विनीत चोपड़ा ने 33 वर्षों की एनसीसी सेवा के लिए उन्हें सम्मानित किया। समारोह भावुक माहौल में संपन्न हुआ, जहां शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
