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सूदखोर महाजनों द्वारा पिता की हत्या से मर्माहत शिबू सोरेन को बनाया दिशोम गुरु…संथाली भाषा में दिशोम गुरु का अर्थ देश का गुरु होता है

अनिल मिश्र / रांची

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म वर्तमान झारखंड प्रदेश के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के नेमरा गांव में 11 जनवरी 1944 को हुआ था। गांव के ही स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लिए दिशोम गुरु का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। महज 13 साल की उम्र के थे, जब उनके पिता शोभराय सोरेन की हत्या महाजनों ने कर दी। इसके बाद शिबू सोरेन ने पढ़ाई छोड़ दी और महाजनों के खिलाफ संघर्ष का फैसला किया।झारखंड प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन का आज सोमवार सुबह 8.56 बजे निधन हो गया। वे पिछले लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 81 वर्षीय शिबू सोरेन किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। करीब डेढ़ महीने पहले उन्हें स्ट्रोक भी आया था, उसके बाद से उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। पिछले एक महीने से वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन का झारखंड प्रदेश में भगवान बिरसा मुंडा के बाद इनका बहुत बड़ा कद है।
पिता की हत्या के बाद उन्हें लगा कि पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है महाजनों के खिलाफ आदिवासी समाज को इकट्ठा किया जाए। उन्होंने सूदखोर महाजनों के खिलाफ काम करना शुरू किया। 1970 में वे महाजनों के खिलाफ खुल कर सामने आए और धान कटनी आंदोलन की शुरुआत की। सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन चलाकर शिबू सोरेन चर्चा में आए, लेकिन महाजनों को अपना दुश्मन बना लिया। शिबू को रास्ते से हटाने के लिए महाजनों ने भाड़े के गुंडे जैसे लोग जुटाए। उन दिनों आदिवासियों को जागरूक करने के लिए शिबू सोरेन बाइक से गांव-गांव जाते।इसी दौरान एक बार उन्हें महाजनों के गुंडों ने घेर लिया। बरसात का मौसम था। बराकर नदी उफान पर थी। शिबू सोरेन समझ गए कि अब बचना मुश्किल है। उन्होंने आव देखा न ताव, अपनी रफ्तार बढ़ाई और बाइक समेत नदी में छलांग लगा दी। सभी को लगा उनका मरना तय है, लेकिन थोड़ी देर बाद शिबू तैरते हुए नदी के दूसरे छोर पहुंच गए। लोगों ने इसे दैवीय चमत्कार माना। आदिवासियों ने शिबू को ‘दिशोम गुरु’ कहना शुरू कर दिया। संताली में दिशोम गुरु का अर्थ होता है देश का गुरु। कभी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा बिहार प्रदेश का बंटवारा कर झारखंड प्रदेश का अलग सृजन करने के लिए कहा जाता था कि मेरे मरने के बाद यानी लाश पर ही बंटवारा होगा। लेकिन इसी दिशोम गुरु ने लालू प्रसाद यादव को समर्थन देकर उनके ही कार्यकल में बिहार प्रदेश से अलग होकर झारखंड प्रदेश का अलग सृजन करवाने में कामयाब हो गए। झारखंड प्रदेश बनने के बाद झारखंड के सबसे पहले और तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, पहले 2005 में 10 दिनों के लिए (2 मार्च से 12 मार्च तक), फिर 2008 से 2009 तक, और फिर 2009 से 2010 तक। वे झामुमो के अध्यक्ष भी थे, जो इंडिया गठबंधन का एक घटक है। सोरेन 1980 से 1984, 1989 से 1998 और 2002 से 2019 तक दुमका से लोकसभा के संसद सदस्य रहे। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में तीन बार कोयला मंत्री के रूप में भी कार्य किया। 2004 में, 2004 से 2005 तक और 2006 तक कोयला मंत्री रहे। उनके निधन पर देश के महामहिम राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित देश एवं प्रदेश के अधिकांश नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए अपूरणीय क्षति बताया है।

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