मुख्यपृष्ठविश्वचमक और फीकी पड़ेगी?..चमक और फीकी पड़ेगी?

चमक और फीकी पड़ेगी?..चमक और फीकी पड़ेगी?

धीरज फूलमती सिंह
चीन की अर्थव्यवस्था में भूचाल! चीन की स्थानीय सरकारें अब अपनी सरकारी इमारतें और दूसरी संपत्तियां तक बेच रही हैं, ताकि कर्मचारियों की तनख्वाह और दूसरे खर्च पूरे किए जा सकें। सवाल है कि क्या दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नकदी की कमी से जूझ रही है?
चीन का रियल एस्टेट क्षेत्र कभी उसकी जीडीपी में करीब १२.३ प्रतिशत का योगदान देता था, लेकिन २०२० के बाद यह घटकर करीब ६.१ प्रतिशत रह गया। सेकेंडरी मार्केट में घरों की कीमतों में लगातार ४४ महीनों से गिरावट की खबरें हैं। यानी यह कुछ महीनों का मामूली उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी संकट है।
चीन में जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास होता है। आम लोग और कंपनियां जमीन खरीदने के बजाय उसके इस्तेमाल के लिए लंबी अवधि के पट्टे का अधिकार लेते हैं। लंबे समय तक स्थानीय सरकारों की कमाई का बड़ा हिस्सा जमीन के इस्तेमाल के अधिकार बेचने से आता था, लेकिन रियल एस्टेट कंपनियों पर बढ़ते कर्ज और सरकारी सख्ती के कारण संपत्तियों की मांग घटने लगी। नतीजतन, जमीन की बिक्री गिरी और स्थानीय सरकारों की कमाई का प्रमुख स्रोत कमजोर पड़ गया।
दूसरी तरफ, चीन का सरकारी कर्ज भी तेजी से बढ़ा है। आधिकारिक आंकड़ों के अलावा स्थानीय सरकारों की वित्तपोषण कंपनियों के जरिए लिया गया कर्ज भी चिंता का विषय है। इसे छिपा हुआ कर्ज कहा जाता है, क्योंकि इसकी पूरी तस्वीर सरकारी खातों में सीधे दिखाई नहीं देती। चीन के कुल सरकारी कर्ज का जीडीपी के मुकाबले करीब १२४ प्रतिशत तक पहुंचने का दावा भी किया जा रहा है।
इस संकट का असर सरकारी कामकाज पर भी पड़ रहा है। बीजिंग समेत कुछ क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह में कटौती और भुगतान में देरी की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, इसका असर हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं है। चीन की समस्या केवल बढ़ते कर्ज तक सीमित नहीं है। कमजोर घरेलू मांग, रियल एस्टेट संकट और निवेशकों के घटते भरोसे ने भी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में सवाल है कि क्या चीन इस वित्तीय दबाव से उबर पाएगा या उसकी आर्थिक

अन्य समाचार