मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी:`५० लाख का नाश्ता

झांकी:`५० लाख का नाश्ता

अजय भट्टाचार्य

सूरत में `फर्जी तोड़-फोड़’ विवाद के बाद राजकोट नगर निगम के खर्चों में कथित गड़बड़ी का पता चला है। जांगलेश्वर में तोड़-फोड़ अभियान के लिए ३ करोड़ रुपए से ज्यादा के बिल नई चुनी हुई राजकोट नगर निगम के सामने रखे गए हैं, जिससे जनता के पैसे के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे ज्यादा विवादित खर्चों में नाश्ता-पानी पर कथित तौर पर ५० लाख रुपए खर्च किए गए। इसमें काजू कचौरी और अंजीर-खजूर रोल वाले नाश्ते पर २७ लाख और बोतलबंद पीने के पानी पर २३ लाख रुपए शामिल हैं। तीन दिन चले इस अभियान में लगभग १,५०० ढांचों को तोड़ा गया, बुलडोजर, जेसीबी और ट्रैक्टरों के लिए १.७ करोड़ रुपए और वीडियोग्राफी के लिए २४ लाख रुपए का खर्च भी शामिल है। अगर बिल असली हैं, तो हर रुपये का हिसाब देना होगा। अगर उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, तो जाहिर है कि सवाल यह उठता है कि इससे किसे फायदा हुआ?
भारत २०४७
कल्पना करें कि मुंबई शंघाई बन गई है और दिल्ली बीजिंग। हर तरफ हमारे शहरों की स्काइलाइन चीन के शहरों जैसी हो गई है। उद्योग-धंधे तो ऐसे फल-फूल रहे हैं जैसे साक्षात विश्वकर्मा स्वयं ही हर परियोजना के प्रबंधक हों। समंदरों में हमारे जहाजों की तूती बोल रही है कोई अमेरिका या ईरान हमारे जहाजों को हाथ नहीं लगा सकता। हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर डंका बज रहा है। वीजा देने के लिए तमाम देशों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। वैश्विक पासपोर्ट सूची में हम टॉप १० में हैं। हम एक देश, एक चुनाव और एक पार्टी की तरफ मजबूत कदम उठा रहे हैं। विकसित भारत की एक बड़ी शर्त है विपक्ष मुक्त भारत। चीन की तरह जहां किसी भी निर्णय में कभी कोई बाधा नहीं आती। हमारी मीडिया का जो होना था वो हो चुका है, अब तो ट्रंप ने भी सर्टिफिकेट दे दिया। सरकार को एक बेदर्द-बेरहम कार्पोरेट की तरह चलाने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं। २०४७ तक की राह अब यही है शायद!
ज्यादा जोगी, मठ उजाड़
कहावत है `ज्यादा जोगी मठ उजाड़।’ अब पार्टी में सारे नेता ही नेता हैं, कार्यकर्ता कोई नहीं बचा। तभी तो पार्टी के पुरखे श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को मुर्खजी कर दिया। बलिदान दिवस व जन्मदिवस मिलाकर एक पखवाड़े का कार्यक्रम घोषित। आगरा में बाकायदे मंच पर टंगे बैनर में ‘मुर्खजी’ को श्रद्धांजिल दे दी गई।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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