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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निकला समाधान, ओबीसी आरक्षण के साथ मुंबई मनपा के होंगे चुनाव!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मुंबई और ठाणे महानगरपालिकाओं सहित महाराष्ट्र की सभी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक पैâसले में कहा कि महानगरपालिकाओं, जिला परिषदों व अन्य स्थानीय संस्थाओं में २७ फीसदी ओबीसी आरक्षण के साथ चुनाव कराए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नई प्रभाग रचना को चुनौती देनेवाली सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए यह पैâसला सुनाया। इसके साथ ही मुंबई महानगरपालिका के २२७ वार्डों सहित पूरे महाराष्ट्र में अब चुनावी रण शुरू होने जा रहा है।
नई प्रभाग रचना के अनुसार होंगे मनपा चुनाव
पिछले अध्यादेश ने अटकाया था मामला

दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र की लंबित चुनाव प्रक्रिया पर सुनवाई हुई थी। ६ मई को अदालत ने राज्य सरकार को चुनाव कराने के निर्देश देते हुए यह स्पष्ट किया था कि प्रभाग रचना का अधिकार राज्य सरकार के पास ही है। इस आदेश के अनुसार राज्य सरकार को नई प्रभाग रचना करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इस आदेश के संदर्भ में लातूर जिले की औसा नगर परिषद से संबंधित एक हस्तक्षेप याचिका दायर की गई थी, जिसमें नई प्रभाग रचना पर आपत्ति जताई गई थी।
सोमवार को इसी याचिका पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता में सुनवाई हुई और खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सभी स्थानीय निकाय चुनाव २७ फीसदी ओबीसी आरक्षण और नई प्रभाग रचना के अनुसार ही होंगे। साथ ही नई रचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने मई में यह निर्देश दिया था कि लंबित चुनावों के लिए चार सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी की जाए और चार महीनों में चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि वर्ष १९९४ से २०२२ तक जिस तरह से ओबीसी आरक्षण लागू था, उसी आधार पर स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जाएं। तब भी अदालत ने नई प्रभाग रचना को मान्यता दी थी। अब उसी निर्णय के तहत आगामी सभी चुनाव नई रचना और २७ फीसदी ओबीसी आरक्षण के साथ कराना अनिवार्य होगा।

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