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संडे स्तंभ : मुंबई और अगाथा क्रिस्टी का पहला नॉवेल

विमल मिश्र
महाराष्ट्र राज्य के गठन में अभी देर थी। लगभग आज का पूरा महाराष्ट्र सूबा, गुजरात के साथ मिलकर उन दिनों ‘बंबई’ कहलाता था। ११ जनवरी, १९६० की एक दोपहरी। मुंबई के सांताक्रुज एयरपोर्ट पर इंडियन एयरलाइंस का एक विमान लैंड होता है और उससे नीचे उतरती है भारी शरीर और मंझोले कद की ७० वर्षीया एक ब्रिटिश लेडी। हवाई अड्डे पर मौजूद चंद सरकारी अधिकारियों को छोड़कर मुंबई में किसी को आभास नहीं है कि एक विश्वविख्यात हस्ती उनके शहर में आई है। यह महिला हैं अगाथा क्रिस्टी – ‘क्वीन ऑफ क्राइम फिक्शन’ कहलाने वाली विश्व की सर्वकालीन ‘बेस्ट सेलर’ और सबसे प्रसिद्ध रहस्य-रोमांच उपन्यासकार।
अगाथा क्रिस्टी (१८९०-१९७६) का नाम भला किसने नहीं सुना होगा। अगाथा क्रिस्टी की अंग्रेजी के अलावा १०० से भी अधिक भाषाओं में लगभग दो अरब से ज्यादा पुस्तकें सिर्फ एक सदी के भीतर बिक चुकी हैं। लोकप्रियता में उनकी तुलना सिर्फ शेक्सपियर से की जा सकती है, जिनकी लगभग चार अरब किताबें बिकी हैं, पर चार सदी से भी ज्यादा समय में या फिर बाइबल से, जिसकी बिक्री लगभग पांच अरब प्रतियों की है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो अगाथा आनेवाले वर्षों में इन दोनों को भी पीछे छोड़कर विश्व इतिहास में सबसे ज्यादा बिकने वाली लेखक बन जाएंगी। उनका उपन्यास ‘माउस ट्रैप’ के नाम भी एक विश्व कीर्तिमान है। ३०,००० मंचनों के साथ वह विश्व का सबसे अधिक मंचित नाटक माना जाता है।
अगाथा क्रिस्टी की चर्चा निकली है, हालिया इस खबर से कि ‘क्वीन ऑफ क्राइम फिक्शन’ अपने विदेशी दौरों के दौरान भारत भी आई थीं। इससे पहले आम मान्यता थी कि वे भारत नहीं आईं। मार्च, २०२४ में क्रिस्टी के पोते मैथ्यू प्रिचर्ड और उनकी पत्नी लूसी से उनके वेल्स स्थित घर में हुई एक मुलाकात ने यह राजफाश कर दिया। पता चला कि अगाथा भारत आई थीं, वह भी एक बार नहीं, दो बार। मैथ्यू के पास एक पुरानी तस्वीर है, जिसमें फूलों की माला पहने अगाथा इंडियन एयरलाइंस के विमान से उतरती दिखाई दे रही हैं।
अगाथा क्रिस्टी की यह भारत यात्रा जनवरी, १९६० में हुई थी। सीलोन (आज का श्रीलंका) और पाकिस्तान की यात्रा के साथ ११ जनवरी से २ फरवरी तक उन्होंने बंबई (मुंबई) का दौरा किया, छत्रपति संभाजी नगर जाकर अजंता की गुफाएं देखीं और मद्रास (चेन्नई), नेपाल और पटना होते हुए दिल्ली लौटीं, जहां २८ जनवरी से २ फरवरी तक पांच सितारा अशोक होटल उनका ठिकाना बना। १७ फरवरी, १९६० को वे कराची के लिए रवाना हुईं। बेटी रोजलिंड हिक्स और एजेंट एडमंड कॉर्क को लिखे उनके कुछ पुराने पत्रों में इस यात्रा का जिक्र मिलता है। माना जाता है कि यह यात्रा उनके दूसरे पति पुरातत्वविद मैक्स मलोवन के लेक्चर टूर से जुड़ी हुई थी। एक वर्ष बाद अपनी दूसरी यात्रा में उनके श्रीनगर जाने का भी जिक्र मिलता है, जहां वे ओबेराय पैलेस होटल में ठहरी थीं। वहां से दिल्ली लौटकर अशोक होटल में एक बार फिर उनका ठहराव हुआ।
मुंबई यात्रा में अगाथा किस होटल में ठहरी थीं इसका जिक्र नहीं मिलता। संभवत: इसके पीछे सुर्खियों से दूर रहने का उनका स्वभाव जिम्मेदार रहा होगा। यह भी हो सकता है कि उन्होंने अपने बजाय अपने पति के नाम से ठहरना पसंद किया हो।
बेस्ट सेलर्स की महारानी
१५ सितंबर, १८९० को इंग्लैंड के टॉर्क्वे में अमेरिकी पिता और ब्रिटिश मां से जन्मी अगाथा क्रिस्टी (पूरा नाम अगाथा मेरी क्लरिस्सा क्रिस्टी और लेडी मैलोवैन/डेम अगाथा क्रिस्टी) ने अपने जीवकाल में मिस्ट्री, सस्पेंस, रोमांस – कई शैलियों में हर वर्ष लिखते हुए ६६ उपन्यास, नाटक और ढेर सारी कहानियां लिखीं। मैरी वेस्टमैकोट के नाम से लिखे उनके लगभग आठ उपन्यास अलग हैं। उन्होंने बहुत सारे ‘ट्विस्ट’ ईजाद और लोकप्रिय किए। इनके द्वारा रचित दो मुख्य पात्र हैं एर्क्यूल प्वारो और मिस मार्पल। उनके उपन्यासों व कथाओं के प्लॉट का अन्य लेखकों व फिल्मकारों ने बार-बार उपयोग किया और आज तक कर रहे हैं। मशहूर हिंदी फिल्म ‘गुमनाम’ उनके उपन्यास ‘एंड देयर वेयर नन’ पर ही आधारित है।
भारतीय क्राइम राइटर मंजरी प्रभु से बातचीत में अगाथा ने कबूल किया था कि १९२० में प्रकाशित उनका पहला ही उपन्यास ‘द मिस्टीरियस अफेयर एट स्टाइल्स’, जो पाठक को पारिवारिक कलह की वजह से हुई हत्या की सनसनीखेज कहानी से परिचित कराता है – भारत के मशहूर हिल स्टेशन मसूरी के सेवाय होटल में १९११ में विशेष किस्म के एक जहर से मृत पाई गई ४९ वर्षीया प्रâांसिस गार्नेट ओर्म की वास्तविक हत्या से प्रेरित था। उनके लिखे हुए में भारतीय जड़ी-बूटियों से बने इसी प्रकार के लाइलाज घातक विषयों की चर्चा मिलती है। उनके किसी भी उपन्यास की विषय वस्तु भले ही भारत न हो, पर उनके पात्रों में कई भारत में पैदा हुए, पले-बढ़े या यहां काम कर चुके हैं, सबसे ज्यादा सैनिक अधिकारी। यही नहीं, उनके पहले पति आर्चीबाल्ड क्रिस्टी के परिवार का भी भारतीय प्रशासनिक सेवा से संबंध रहा।
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर
संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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