विमल मिश्र
मुंबई
गुजरे जमाने में देश के राजा-रजवाड़ों, बादशाहों और सुल्तानों ने अपनी जगहों के साथ मुंबई में भी अपने आलीशान महल बनवाए। इनमें मलबार हिल व ब्रीच कैंडी जैसे दक्षिण मुंबई के इलाकों में मौजूद कई महल आज भी गुजरे जमाने की शान-शौकत की याद दिलाते हैं। कुछ अपना रूप और भूमिका बदल बैठे हैं और कुछ अपनी यादें छोड़ जमाने की रफ्तार में गुम हो गए हैं।
राजभवन
‘मेनोर हाउस’ और ‘कंपनी हाउस’ से ‘सैंस परेल’ के सफर तक मुंबई के गवर्नरों के आधिकारिक आवास ‘हाउस’ ही बने रहे। उन्हें ‘राजभवन’ बनाया आजादी के बाद आए भारतीय राज्यपालों ने। ‘राजभवनों की रानी’ और देश का सर्वश्रेष्ठ ‘राजभवन’ यह यूं ही नहीं कहलाता।
सोफिया कॉलेज
लुभावना सौंदर्य, ज्यामितीय डिजाइन और पैलेस जैसा लुक। महल से कॉलेज बना ब्रीच कैंडी का अभिजात सोफिया विमंस कॉलेज देश का अग्रणी महिला शिक्षा संस्थान है। आपने इस कैंपस को कई फिल्मों में देखा होगा। यह पूरा कैंपस कभी ईस्ट इंडिया कंपनी के आधीन में था। कॉलेज बनने से पहले १९२३ में इंदौर और १९३७ में भावनगर के महाराजाओं ने इसका उपयोग आवास और हॉलिडे होम के रूप में किया।
कच्छ का राजसी महल
मलबार हिल पर समुद्र के सामने कच्छ के महाराजा ने सुनहरे बलुआ पत्थर से अपना महल बनवाया था, जहां अब वाल्सिंघम हाई स्कूल फॉर गर्ल्स है। १९५० के दशक में आजादी के बाद इसमें एक अतिरिक्त मंजिल और जोड़ी गई।
आनंद भवन
ब्रीच कैंडी अस्पताल के बगल में यह शांत सी इमारत कभी बांसडा के महाराजा का निवास हुआ करती थी। आज यह ‘आनंद भवन’ है – परमाणु ऊर्जा आयोग के अधिकारियों का निवास स्थान।
लिंकन हाउस
मुंबई के सबसे पॉश इलाके ब्रीच कैंडी में दो एकड़ में फैला लिंकन दरअसल, पूर्व अमेरिकी काउंसलेट नहीं, एक महाराजा का भव्य महल है। दो एकड़ क्षेत्र में फैला ५०,००० वर्ग फुट का तिमंजिला लिंकन हाउस सितंबर, २०१५ में अरबपति सीईओ अदार पूनावाला के हाथों ७५० करोड़ रुपए में जब बिका, तब यह देश में सबसे ऊंची कीमत चुकाकर घर खरीदने का रिकॉर्ड था। लिंकन हाउस का इतिहास १९३३ से शुरू होता है, जब यह गुजरात की वांकानेर रियासत के महाराजा प्रतापसिंह जी झाला का महल था और ‘वांकानेर हाउस’ के नाम से प्रसिद्ध था।
किलाचंद हाउस
अपनी बेशुमार शानो-शौकत के लिए मशहूर पटियाला के भूपिंदर सिंह ने ब्रीच कैंडी के पास खूबसूरत फव्वारों और सीढ़ियों वाली २५ बेडरूम वाली एक संगमरमरी हवेली खरीदी है, जिसे ‘किलाचंद हाउस’ के नाम से जाना जाता है। यह हवेली पहले सूरत के एक पारसी पोत निर्माण परिवार के स्वामित्व में थी। बाद में पटियाला के महाराजा और १९३८ में उद्योगपति किलाचंद परिवार की शोभा बन गई।
महल से हॉस्पिटल
ऐसी रेलिंग्ज, इतने विशाल बाग-बागीचे, पोर्च और ड्राइव-इन बहुत कम बंगलों में ही दिखेगी। यह था ‘शैन सोसी’ नामक, जहां बगदादी यहूदी जाने-माने दानी-धर्मी सर डेविड ससून परिवार के साथ रहते थे। आज यह मसीना हॉस्पिटल के नाम से जाना जाता है। दिसंबर, १८८९ में यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक सभा होने का जिक्र भी मिलता है। यहां सर ससून का निजी चिड़ियाघर भी था।
समुद्र महल
वर्ली में ग्वालियर के सिंधियाओं द्वारा निर्मित ‘समुद्र महल’ २० एकड़ में फैला हुआ है। ३५ शयनकक्षों और एक क्लब हाउस के साथ वर्ली स्थित आर्ट डेको शैली की इस इमारत से समुद्र के विस्तार के साथ रेस कोर्स और हाजी अली दरगाह का शानदार नजारा दिखता है। इसकी जगह शिवसागर एस्टेट्स, ईडन हॉल और एक ऊंची मीनार ने ले ली है, पर ‘समुद्र महल’ नाम कायम है। कहते हैं, सिंधिया परिवार आज भी इसकी ऊपरी दो मंजिलों पर रहता है।
धनराज महल
धनराज महल गेटवे ऑफ इंडिया के पास स्थित खूबसूरत आर्ट डेको इमारत है, जिसका निर्माण १९३० के दशक के मध्य में हैदराबाद के महाराजा नरसिंहगीर धनराजगीर ज्ञान बहादुर ने किया था। यह अभिनेत्री जुबैदा बेगम का निवास स्थान रहा।
रॉयल ऑपेरा हाउस
रॉयल ऑपेरा हाउस भारत में बच रहा एकमात्र ऑपेरा हाउस है। महल सा दिखनेवाला मुंबई का सबसे ऐश्वर्यशाली थिएटर।
बॉम्बे कैंसिल
फोर्ट की एशियाटिक सोसायटी और भारतीय रिजर्व बैंक की इमारत के ठीक पीछे पांच सदी पुराने आई.एन.एस. आंग्रे का मुख्य प्रवेशद्वार ‘पोर्चुगीज गेट’ समुद्री दीवार से घिरा भग्नहाल बॉम्बे वैâसिल (या मेनोर हाउस या कैंसल बैरेक्स) मुंबई में पुर्तगाली युग की सबसे महत्वपूर्ण यादगार है। १५३४ में गुजरात के सुल्तान ने जब ‘बंबई’ टापू पुर्तगालियों को सुपुर्द किया तो बॉम्बे वैâसल और फोर्ट क्षेत्रों ने चार तोपों वाली समुद्री दीवार से घिरे एक बंगले के इर्द-गिर्द आकार लिया। इसे गार्सिया द ओर्ता नामक एक पुर्तगाली ने बनवाया था। १६६५ से १७७१ के बीच मेनोर हाउस में मुंबई के २० गवर्नरों का घर रह चुका है।
रॉयल बॉम्बे यॉट क्लब
अपोलो बंदर में स्टीवेंस स्ट्रीट के बीचों-बीच एशिया का सबसे पुराना ट्यूडर-गोथिक क्लासिक शैली में बना पांच मंजिला रॉयल बॉम्बे यॉट क्लब सिर्फ नाम से ही ‘रॉयल’ नहीं, यहां सब कुछ राजसी है। यह उपाधि उसे १८७६ में किसी और से नहीं, इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया ने प्रदान की है।
एस्प्लेनेड हाउस
आधुनिक भारत के निर्माता जमशेदजी टाटा ने करीब १४० वर्ष पहले जब तीन मंजिला एस्प्लेनेड हाउस को अपना आवास बनाया तो फोर्ट क्षेत्र की यह एकमात्र रिहायशी इमारत थी। मुंबई और भारत की तस्वीर बदल देनेवाले कई बड़े निर्णय उन्होंने हजारीमल सोमानी मार्ग स्थित इसी बिल्डिंग में रहते हुए किए। बहरहाल, इसमें टाटा ट्रस्ट के मुख्यालय के अलावा कुछ प्राइवेट कंपनियों के कार्यालय हैं। यहां से कुछ दूरी पर मौजूद टाटा पैलेस उनके छोटे बेटे सर रतन टाटा का आवास रहा है और अब डॉएच्च बैंक कहलाता है।
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)
