-मंगल प्रभात लोढा के बयान पर महायुति में ‘खटपट’ तेज
-विपक्ष ने कहा, ‘यही है महाराष्ट्र की लोकतांत्रिक विडंबना’
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का ‘सुपर कंट्रोल’ अब सवालों के घेरे में आ गया है, क्योंकि भाजपा के मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने कल एक ऐसा बयान दिया, जो महायुति के भीतर ही बड़ा ‘बम’ बनकर फटा है। लोढा ने दावा किया कि भाजपा ही नहीं, दूसरे दल भी महाराष्ट्र में देवाभाऊ की मर्जी से चलते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लोढा का यह इशारा महायुति में शामिल दोनों शिंदे और दादा गुट की ओर है। इससे महायुति में ‘खटपट’ तेज हो गई है।
लोढा ने फडणवीस के ‘सौ चेहरे, सौ पैâसले’ होने की बात कहकर उनके असीमित राजनीतिक प्रभाव को रेखांकित किया। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष ने कहा कि यही है महाराष्ट्र की लोकतांत्रिक विडंबना’, जहां एक व्यक्ति राज्य की पूरी राजनीतिक दिशा तय कर रहा है। बता दें कि मुंबई भाजपा का कल एक सम्मेलन शहर में संपन्न हुआ। इसमें मंत्री लोढा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रशंसा करते हुए सच बयां कर दिया। इस दौरान उन्होंने फडणवीस की प्रशंसा करते हुए यह दावा किया कि हम देवाभाऊ के विभिन्न रूप देख रहे हैं। उनके सौ विभिन्न रूप हैं। उन्होंने पिछले एक साल में कई काम किए। वे नागपुर के सबसे कम उम्र के महापौर बने। भाजपा तो देवाभाऊ मय है ही, लेकिन महाराष्ट्र के अन्य दल वैâसे चलेंगे, यह भी देवाभाऊ ही तय करते हैं। मंत्री लोढा ने कहा कि पांच दिसंबर को उनके शपथ समारोह को एक साल पूरा हुआ।
विपक्षी दलों का पलटवार
लोढा के बयान पर विपक्षी दलों ने तत्काल और तीखा पलटवार किया है। विपक्ष का कहना है कि लोढा का यह कथन महाराष्ट्र की राजनीति में लोकतांत्रिक विडंबना को उजागर करता है, जहां सत्ताधारी दल के एक नेता का इतना ‘सुपर कंट्रोल’ है कि वह न सिर्फ अपनी पार्टी, बल्कि अन्य दलों की चाल भी तय करता है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह बयान सिद्ध करता है कि महायुति सरकार ने जानबूझकर विधानसभा सत्र की अवधि कम रखी और महत्वपूर्ण मुद्दों से पल्ला झाड़ा, क्योंकि उन्हें लोकतंत्र की परवाह नहीं है, बल्कि केवल सत्ता की मनमर्जी चलानी है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि फडणवीस को संतुष्टि का दावा करने के बजाय, किसानों की आत्महत्या और भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब देना चाहिए।
