-अमेरिका ने दी क्लीन चिट
सीरिया का इतिहास कई दशकों तक राजनीतिक उथल-पुथल, गृहयुद्ध और अंतर्राष्ट्रीय अलगाव से भरा रहा है। १९७९ में पहली बार अमेरिका ने सीरिया को ‘आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश’ की सूची में डाला था, जिससे २०२५ में उसे मुक्ति मिली।
सीरिया पर वैâसे लगा था ‘टेरर कंट्री’ का दाग?
आतंकी गुटों को समर्थन (१९७०-१९८० के दशक): हाफेज अल-असद (बशर अल-असद के पिता) के शासनकाल में सीरिया ने मध्य पूर्व के कई चरमपंथी और सशस्त्र समूहों को शरण, हथियार और वित्तीय सहायता दी। इनमें हिजबुल्लाह, हमास और ‘पॉपुलर प्रâंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फस्तीन’ जैसे संगठन शामिल थे।
लेबनान में हस्तक्षेप और इजरायल-विरोधी रुख: सीरिया ने लेबनान गृहयुद्ध के दौरान अपनी सेना भेजी और इजरायल के खिलाफ काम करने वाले आतंकी गुटों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया।
असद शासन का क्रूर दौर और आईएसआईएस का उदय: २०११ में जब सीरियाई जनता ने लोकतंत्र की मांग की, तो बशर अल-असद ने अपनी ही जनता पर रासायनिक हथियारों और बैरल बमों से हमला किया। इस गृहयुद्ध की अराजकता का फायदा उठाकर आईएसआईएस (दाएश) और अल-कायदा जैसे खूंखार आतंकी संगठनों ने सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया।
वैâसे हटा ‘टेररिस्ट कंट्री’ का दाग?
असद शासन का पतन: दिसंबर २०२४ में विद्रोही गुटों के रणनीतिक हमले के बाद बशर अल-असद को देश छोड़कर भागना पड़ा, जिससे दशकों पुरानी तानाशाही का अंत हुआ।
नई अंतरिम सरकार और अहमद अल-शरा का नेतृत्व: सीरिया में अहमद अल-शरा के नेतृत्व में बनी नई अंतरिम सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आश्वासन दिया कि सीरिया की धरती का इस्तेमाल अब किसी भी देश या आतंकी गुट द्वारा नहीं किया जाएगा।
एचटीएस का मेकओवर: विद्रोही गुट ‘हयात तहरीर अल-शाम’ (एचटीएस) ने अल-कायदा से अपने सभी नाते बहुत पहले तोड़ लिए थे और खुद को एक जिम्मेदार राजनीतिक व सैन्य बल के रूप में पेश किया।
अमेरिकी कूटनीति में बदलाव: २०२५ में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व में शांति और नए सीरिया के पुनर्निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीरिया और एचटीएस से आतंकवादी का टैग पूरी तरह हटा दिया।
अब सीरिया पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हट रहे हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग, विदेशी निवेश और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
