कविता श्रीवास्तव
‘उठा ले रे देवा, उठा ले… मेरे को नहीं रे, इन दोनों को उठा ले…।’ कॉमेडी फिल्म ‘हेराफेरी’ का सबसे लोकप्रिय कैरेक्टर ‘बाबूराव’ अपने साथियों राजू (अक्षय कुमार) और श्याम (सुनील शेट्टी) की हरकतों से तंग आकर यह डायलॉग जब बोलता है तो दर्शक हंस-हंसकर लोटपोट हो जाते हैं। फिल्म ‘हेराफेरी’ ही नहीं उसके अगले सीक्वल के लिए भी ‘बाबूराव’ का मजबूत वैâरेक्टर ही इस फिल्म की जान है। उस ‘बाबूराव’ को आप भी पहचानते ही होंगे। जी हां, परेश रावल अभिनीत बाबूराव गणपतराव आप्टे का वह किरदार एक बार फिर चर्चा में आया है। फिल्म ‘हेराफेरी’ के निर्माता फिरोज ए. नाडियाडवाला ने ‘बाबूराव’ वैâरेक्टर का इस्तेमाल ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के फिनाले में किए जाने पर आपत्ति जताई है। इस संबंध में अपने वकील के माध्यम से उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स व अन्य को २५ करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस दिया है। नोटिस में कहा गया है कि बौद्धिक संपदा कोई मामूली चीज नहीं है। ये क्रिएटिविटी की जान होती है। फिल्म ‘हेराफेरी’ के आइकॉनिक किरदार को बिना अनुमति के व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया है। दरअसल, सफेद धोती और ग्रामीण शैली के सफेद कुर्ताधारी ‘बाबूराव’ का भोलापन, उसकी हास्यास्पद हरकतें, उसकी नाड़ेवाली चड्ढी, मोटा चश्मा, चमड़े की मोटी चप्पल और उसके बुजुर्ग होने का चिड़चिड़ापन आदि का संमिश्रण इस वैâरेक्टर को बहुत ही टिपिकल और विशिष्ट बनाता है। कपिल शर्मा के शो के फिनाले में हास्य कलाकार कीकू शारदा ने ‘बाबूराव’ का यह कैरेक्टर निभाया है। नाडियाडवाला का कहना है कि यह लोकप्रिय किरदार उनकी सोच, उनके परिश्रम और उनकी रचनात्मकता से उत्पन्न हुआ है इसलिए उसके इस्तेमाल पर उनका अधिकार है। किसी और के द्वारा इस्तेमाल किया जाना कॉपीराइट एक्ट और ट्रेडमार्क एक्ट का उल्लंघन है।
शतकवीर जापानी
जापान में लगभग एक लाख लोगों की आयु १०० वर्ष से अधिक है। आश्चर्य की बात यह है कि इनमें ८८ प्रतिशत महिलाएं हैं। जापान में सर्वाधिक उम्रदराज व्यक्ति ११४ वर्ष का है। दरअसल, जापानियों की लंबी व स्वस्थ आयु के पीछे उनका रहन-सहन और उनका खान-पान मुख्य कारण है। जापान के लोग रेड मीट नहीं खाते हैं। हां, वे सब्जियां और मछलियां खाते हैं। नमक का सेवन न के बराबर करते हैं। साथ ही वे हमेशा चलने-फिरने और एक्टिव रहने पर विश्वास रखते हैं। यातायात के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ही प्राथमिकता देते हैं। यानी खानपान में नियंत्रण और परहेज तथा अपने शारीरिक क्रियाकलापों में निरंतरता बनाए रखने की जापानी आदत ने जापानियों को शतकवीर बनाया है। आराम पसंद और खानपान के शौकीन चटोरे भारतीयों को इससे कुछ सीखना चाहिए।
