मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : आफत बरसे, किसान तरसे

तड़का : आफत बरसे, किसान तरसे

कविता श्रीवास्तव

सितंबर की बरसात ने महाराष्ट्र में गन्ने की फसल को बुरी तरह बर्बाद कर दिया है। कुदरत का खेल भी अजीब है कि अक्सर सूखा पीड़ित रहनेवाला मराठवाड़ा इस बार भारी वर्षा की बाढ़ में डूब गया। उपजाऊ मिट्टी इतनी बह गई है कि आनेवाले कई वर्षों तक खेती करना संभव नहीं होगा। गन्ने की उपज पर किसान उम्मीद लगाए बैठे थे। परंतु खेतों में लगे पौधे बह जाने से गन्ना किसानों की हालत खराब है। बड़ी चर्चा के बाद अब जाकर राज्य सरकार ३१, ६२८ करोड़ का पैकेज ले आई है। लेकिन प्रत्येक चीनी मिल से मोटी रकम मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने का फरमान भी है। राज्य में लगभग २०० चीनी मिलें हैं। विपक्ष कह रहा है कि किसानों को राहत देने के लिए सरकार अपनी जिम्मेदारी चीनी मिलों पर डाल रही है। इस ‘लेवी’ (एक प्रकार के कर) का विपक्ष सहित कई किसान नेताओं ने विरोध किया है। आशंका है कि यह किसानों पर ‘अतिरिक्त वित्तीय बोझ’ होगा। चीनी मिलें किसानों के बकाये से यह रकम काट सकती हैं। मराठवाड़ा क्षेत्र में उपजाऊ जमीन इस कदर बह गई है कि आनेवाली दो पीढ़ियों तक वहां खेती करना संभव नहीं होगा। सितंबर में भारी वर्षा और बाढ़ से मराठवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों सहित राज्यभर में कुल मिलाकर ६८.६९ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगी फसलें नष्ट हो गई हैं। आज पूरा मराठवाड़ा कीचड़ और पानी में डूबा हुआ है। फसलें, घर, पशुधन सब बह गए हैं। बीड, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, यवतमाल, लातूर, सोलापुर, धाराशिव, जालना, परभणी, बुलढाणा, हिंगोली, नासिक सहित कई जिलों में फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है। ३६ में से २९ जिले और २५३ तालुका प्रभावित हुए हैं। उपजाऊ जमीन पूरी तरह से बह चुकी है। अनुमान है कि ४० लाख किसान और ६० लाख एकड़ जमीन इस बाढ़ से प्रभावित हुई है। विपक्ष कह रहा है कि ऐसे में केंद्र को चाहिए कि वह सिर्फ दिखावा और छलावा न करे। इस संबंध में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि वे प्रति हेक्टेयर ५० हजार रुपए की सीधी सहायता और कर्ज में डूबे किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणा करें। राज्य सरकार का ताजा राहत पैकेज फसल नुकसान, मिट्टी के कटाव, घायलों के इलाज, मृतकों के परिजनों को मुआवजा, घरों, दुकानों और पशु शेड को हुए नुकसान की भरपाई जैसी कई सहायता के लिए घोषित किया गया है। विपक्षी दलों ने इस राहत पैकेज को अपर्याप्त बताया है। गौरतलब है कि इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक राज्य में ७८१ किसानों ने आत्महत्या की है। पिछले कुछ दिनों की भारी बारिश में ७४ और किसानों की जानें गई हैं। पंजाब जैसे राज्य ने बिना किसी केंद्रीय मदद के अपनी तरफ से प्रति हेक्टेयर ५० हजार रुपए तक की सहायता दी है, तो महाराष्ट्र जैसा समृद्ध राज्य ऐसी आर्थिक मदद क्यों नहीं दे सकता है?

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