-उत्सवों ने बिगाड़ा स्कूलों का टाइम टेबल
-अगस्त में १० दिनों तक थोपे गए आयोजन
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य शिक्षा विभाग के लगातार आदेशों और परिपत्रों ने स्कूलों की पढ़ाई को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अगस्त महीने में ही १० दिनों तक अलग-अलग उत्सव थोपे गए, वहीं सितंबर का शेड्यूल भी आयोजनों से भरा पड़ा है। नतीजतन, पढ़ाई पर भारी पड़े इन उत्सवों ने स्कूलों का टाइम टेबल पूरी तरह बिगाड़ दिया है। शिक्षक खुले तौर पर कह रहे हैं कि वे अब पढ़ाई से ज्यादा इवेंट मैनेजर बनकर रह गए हैं, जबकि विभाग का तर्क है कि इन कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि अगस्त में ही नव भारत साक्षरता अभियान, हर घर तिरंगा, मेरी माटी मेरा देश, विभाजन स्मरण दिवस, हमारा विद्यालय हमारा स्वाभिमान और राष्ट्रीय क्रीड़ा दिवस जैसे करीब दस दिन स्कूलों को आयोजनों में उलझाकर पढ़ाई का नुकसान किया गया। इतना ही नहीं, महायुति सरकार के परिपत्रों में चक्रधर स्वामी अवतार दिवस, नाना पाटील जयंती और अन्ना भाऊ साठे जयंती भी जोड़ दिए गए। अब सितंबर में भी शिक्षक दिवस, राजे उमाजी नाईक जयंती, पोषण पखवाड़ा, साक्षरता सप्ताह, नव भारत साक्षरता मिशन परीक्षा और रंगोत्सव जैसे आयोजन थोपे जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि आखिरी समय में थोपे गए ये आदेश छात्रों को पढ़ाने की समयसारिणी को तहस-नहस कर देते हैं। शिक्षकों के बीच यह आम हो गया है कि हम शिक्षक या इवेंट मैनेजर हैं। वहीं विभाग का तर्क है कि ये आयोजन केवल औपचारिक नहीं, बल्कि बच्चों को समाज का बेहतर नागरिक बनाने के लिए जरूरी कदम हैं।
औपचारिक आयोजनों की भरमार
शिक्षक सेना के अध्यक्ष जालिंदर सरोदे ने चेताया कि खासकर अक्टूबर सेमेस्टर पहले से ही छुट्टियों और परीक्षाओं के कारण चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में अतिरिक्त कार्यक्रम बोझ बढ़ाते हैं। स्कूल प्रमुखों का कहना है कि कई संस्थान पहले से साहित्य दिवस, खेल सप्ताह और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं, लेकिन विभागीय दबाव में अब औपचारिक आयोजनों की भरमार हो गई है। उन्हें इनकी तस्वीरें खींचकर ऑनलाइन अपलोड भी करनी पड़ती हैं।
