ईडी सरकार के भीतर बढ़ा टकराव
अलग चुनाव लड़कर एक-दूसरे के फाड़ रहे हैं कपड़े
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में इन दिनों आंतरिक कलह खुलकर सतह पर आ गई है। इसी क्रम में दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक से अजीत दादा गुट के सांसदों का ‘गायब’ रहना इस बात का ताजा संकेत है कि महायुति के भीतर अविश्वास और रंजिश अपनी चरम अवस्था में पहुंच चुकी है। स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग लड़ने के निर्णय ने तनाव को और बढ़ा दिया है। परिणाम यह हुआ है कि मैदान में तीनों ही दल सीधे एक-दूसरे के विरोध में उतर गए हैं और कार्यकर्ताओं की खुली टूट-फूट से लेकर नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी तक सब कुछ सामने आने लगा है।
महाराष्ट्र में खटपट का दिल्ली में दिखा असर!
स्थानीय निकायों के चुनाव का प्रभाव
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले दिल्ली में सर्वदलीय बैठक होती है। कल दिल्ली में यह बैठक हुई। आमतौर पर दिल्ली में होनेवाली सर्वदलीय बैठक में अजीत दादा गुट की ओर से प्रफुल्ल पटेल या सुनील तटकरे उपस्थित रहते हैं। मगर कल दादा गुट का एक भी सांसद इस बैठक में मौजूद नहीं था। दूसरी ओर लोकसभा में शिंदे गुट नेता श्रीकांत शिंदे सर्वदलीय बैठक में उपस्थित रहते हैं। लेकिन कल उनके बजाय इस बैठक में नरेश म्हस्के उपस्थित रहे। ऐसे में चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस सबके के लिए महाराष्ट्र में महायुति के भीतर पैदा हुआ आंतरिक तनाव जिम्मेदार है। राज्य में आनेवाले मंगलवार को नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए मतदान होना है। ३ दिसंबर को इन चुनावों के नतीजे घोषित होंगे। इससे पहले फिलहाल महायुति के तीनों घटकों की ओर से जोरदार प्रचार चल रहा है। महायुति के तीनों घटक नगरपालिका और नगर पंचायतों के चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ रहे हैं। इस वजह से स्थानीय स्तर पर फिलहाल तीनों दलों के बीच संघर्ष छिड़ गया है। स्थानीय स्तर पर तीनों घटक एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को लालच देकर आपस में ही लड़ रहे हैं। साथ ही, राज्य में किसका वर्चस्व है, राज्य की तिजोरी पर किसका नियंत्रण है, इसको लेकर तीनों दलों के नेताओं के बीच शाब्दिक वाद-विवाद छिड़ गया है। इस वजह से तीनों दल एक-दूसरे के विरोध में खड़े हो गए हैं।
रंजिश का प्रत्यक्ष प्रमाण
कल रविवार को दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक में महायुति के तीनों दलों के बीच की दूरी आंतरिक रंजिश का प्रत्यक्ष प्रमाण है। दिल्ली में शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय सांसदों की बैठक होती है। इस बैठक में अजीत पवार गुट और शिंदे गुट के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति अपेक्षित थी। खबर है कि दादा के सांसदों ने इस बैठक की अनदेखी की।
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