-दुनिया भर में आतंकवादी करते हैं इस्तेमाल
-नींद नहीं आती और भूख भी कम लगती है
सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में आतंकियों के मंसूबे खतरनाक नजर आ रहे हैं। यहां पहली बार ‘जिहादी ड्रग्स’ पकड़ी गई है। इसे ‘कैप्टागॉन’ नाम से जाना जाता है और मूल रूप से एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट है। इसे अक्सर ‘जिहादी ड्रग’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि आतंकवादी और उग्रवादी गुट इसे लड़ाई के दौरान थकान, डर और भूख मिटाने के साथ-साथ आक्रामकता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसे ‘गरीबों का कोकीन’ भी कहा जाता है। देश में पहली बार इसकी १८२ करोड़ रुपए की खेप बरामद हुई है। एनसीबी ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत सीरियाई नागरिकों को गिरफ्तार कर इस ड्रग्स को बरामद किया है। जानकारी के अनुसार, मुंद्रा पोर्ट पर सीरिया से ऊन के नाम पर आए कंटेनर से १९६.२ किलोग्राम कैप्टागॉन पाउडर बरामद किया गया। इसके अलावा दिल्ली में एक वाणिज्यिक चपाती काटने की मशीन के अंदर छिपाकर रखी गई ३१.५ किलोग्राम कैप्टागॉन टैबलेट पकड़ी गई।
असली नाम फेनेथाइलिन
कैप्टागॉन का असली नाम फेनेथाइलिन था। इसे १९६० के दशक में मेडिकल इस्तेमाल के लिए बनाया गया था। ज्यादातर गोलियां अवैध लैब में तैयार की जाती हैं और इनमें एम्फेटामाइन, वैâफीन, मेथाम्फेटामाइन और दूसरे सिंथेटिक केमिकल्स मिलाए जाते हैं।
अवैध रूप से रह रहा था
इस मामले में गिरफ्तार सीरियाई नागरिक अवैध रूप से भारत में रह रहा था। वह यहां तस्करी का रैकेट चला रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस ड्रग की खेप को भारत के रास्ते खाड़ी देशों में भेजा जाना था।
