चल रहे एक साथ कई काम
सड़क पर भारी ट्रैफिक जाम
द्रुप्ति झा
घोड़बंदर रोड की समस्या सिर्फ ट्रैफिक जाम नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के अपव्यय का भी संकेत है। यदि रोड टैक्स का सही उपयोग हो और निर्माण गुणवत्ता में सुधार आए तो जनता को मिलनेवाली सुविधा और सुरक्षा में बड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन मौजूदा सरकार के राज में यह दूर की कौड़ी लगती है।
ठाणे-घोड़बंदर रोड पर बड़ी संख्या में गड्ढे होने के कारण यातायात की गति धीमी हो रही है। नतीजतन, वाहनों को ट्रैफिक के दौरान यह दूरी तय करने में एक घंटे से अधिक का अतिरिक्त समय बर्बाद करना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। ठाणे के घोड़बंदर रोड पर भारी वाहनों का आवागमन बड़ी संख्या में होता है और इसके अलावा, इस रोड पर मुंबई, वसई, विरार, भायंदर इलाकों से बड़ी संख्या में हल्के वाहनों का आवागमन भी होता है। ठाणे के घोड़बंदर रोड पर यात्री भारी ट्रैफिक जाम और खराब सड़कों के कारण परेशान हैं। इसके मुख्य कारण रोड पर लंबे समय से चल रहे काम और सड़क के गड्ढे और घटिया गुणवत्ता का काम है। और पश्चिमी एक्सप्रेस हाई-वे को जोड़नेवाले ठाणे के सबसे व्यस्त संपर्क मार्गों में से एक है और ऐसी सड़को का ये हाल है। घोड़बंदर रोड एक खतरनाक सड़क में तब्दील होता जा रहा है।
ट्रैफिक समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने ५०० करोड़ रुपए की परियोजना के तहत रोड को चौड़ा करने की बात कही है, जिसको २०२६ की शुरुआत में पूरा करने के उम्मीद जताई गई है, लेकिन लोगों के शिकायतों के अनुसार, काम बहुत धीमी गति से होने के कारण इस परियोजना को समय पर पूरा कर पाना मुश्किल लग रहा है।
घटिया निर्माण कार्य से परेशानी
गहरे गड्ढों, खराब रोशनी, बिना चिह्नित मोड़ और लंबे ट्रैफिक जाम ने इस मार्ग को लाखों यात्रियों के लिए असुरक्षित और थका देनेवाला बना दिया है। लोगों का कहना है कि वे वर्षों से एक ट्रैफिक-मुक्त, सुरक्षित घोड़बंदर रोड का इंतजार कर रहे हैं, जो अब भी एक सपना है और हकीकत से कोसों दूर है। अंतहीन ट्रैफिक न केवल ऑफिस जानेवालों को घंटों की देरी कराता है, बल्कि परीक्षा के दौरान छात्रों को भी परेशान करता है, जिससे वे समय पर परीक्षा केंद्रों पर नहीं पहुंच पाते। भारी ट्रैफिक से बचने के लिए, कई वाहन चालक सड़क के गलत साइड से निकलने की कोशिश भी करते हैं, जिससे उनकी और दूसरों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
करोड़ों का टेंडर, घटिया दरजे का काम
समाजसेवक संजय नाग ने कहा कि इस परियोजना के काम की गति को देखते हुए लगता है शायद ही यह परियोजना समय पर पूरी हो पाएगी। इस देरी का खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ता है। स्थानीय निवासी श्यामलाल खट्टर का आरोप है कि एक महीने के भीतर ही नई बनी सड़कों में गड्ढे पड़ जाते है। सड़क निर्माण सामग्री की घटिया गुणवत्ता के कारण मरम्मत के कुछ ही हफ्तों के भीतर गड्ढे फिर से उभर आते हैं। पैचवर्क का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता और गड्ढे मौत का जाल बनते जा रहे हैं। सड़कों के विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का टेंडर पास होता है, लेकिन शहर में वो विकास सड़कों पर नजर नहीं आती है, जनता को मूर्ख बनाने के लिए सरकार का ये सब दिखावा भर रह गया है।
वसई-विरार से ठाणे और नई मुंबई की तरफ वाहनों का रेला
वसई-विरार से बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन काम धंधे के लिए ठाणे और नवी मुंबई की तरफ जाते हैं। घोडबंदर रोड से कई हजारों वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। ठाणे से बोरिवली, मीरा-भायंदर, वसई-विरार, पालघर, गुजरात तक तथा गुजरात से घोडबंदर होते भिवंडी और उरण के जेएनपीटी बंदरगाह तक भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद घोड़बंदर सड़क की ये हालत बनी हुई है, जो वाकई में आम जनता की सुविधा और सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है। क्या आम जनता ऐसी ही सुविधाओं के लिए रोड टैक्स भर रही है?
