जेदवी / मुंबई
मुंबईकरों को राहत देने के नाम पर पश्चिम रेलवे का नया पैâसला अब सवालों के घेरे में है। १ मई २०२६ से १७ मौजूदा १२-कोच गैर-एसी लोकल सेवाओं को १५-कोच में बदला जाएगा और १२ नई एसी लोकल सेवाएं शुरू की जाएंगी, लेकिन कुल ट्रेनों की संख्या जस की तस रखी गई है। यानी भीड़ कम करने का कोई ठोस इंतजाम नहीं, सिर्फ डिब्बे बढ़ाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश। सबसे बड़ा झटका आम यात्रियों को लगा है। नॉन-एसी ट्रेनों की संख्या घटाकर उनकी जगह १२ नई एसी ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इसका सीधा असर उन लाखों यात्रियों पर पड़ेगा, जो महंगे किराए के कारण एसी लोकल में सफर करने की स्थिति में नहीं हैं। उनके लिए अब सफर और ज्यादा मुश्किल, भीड़भाड़ वाला और परेशानियों से भरा होगा।
संचालन कारणों का हवाला देते हुए पश्चिम रेलवे ने १५-कोच लोकल ट्रेनों को ग्रांट रोड, चर्नी रोड और मरीन लाइंस जैसे स्टेशनों पर दोनों दिशाओं में ठहराव नहीं देने का पैâसला किया है। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ेगी। पहले से ही भीड़ के बोझ तले दबे दादर स्टेशन पर इन ट्रेनों को प्लेटफॉर्म नंबर ४ पर डबल हॉल्ट देने का निर्णय लिया गया है, जिससे अव्यवस्था और बढ़ने की आशंका है। विरार–दहानू रोड खंड में पहली बार १५-कोच सेवाएं शुरू करने की घोषणा की गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वहां का बुनियादी ढांचा इसके लिए तैयार है या यात्रियों को एक और अव्यवस्था झेलनी पड़ेगी। इन बदलावों के चलते कई लोकल ट्रेनों के समय में फेरबदल भी किया जाएगा, जिससे रोजाना यात्रा करने वालों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। साफ है कि ‘सुविधा बढ़ाने’ के नाम पर लिया गया यह पैâसला आंकड़ों की बाजीगरी ज्यादा और जमीनी हकीकत से दूर नजर आता है।
