मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति में सीटों के लिए संग्राम तेज...भाजपा-फडणवीस की जागीर नहीं विदर्भ!  

महायुति में सीटों के लिए संग्राम तेज…भाजपा-फडणवीस की जागीर नहीं विदर्भ!  

– दादा का करारा प्रहार

-विदर्भ से ही दी चुनौती

सामना संवाददाता / मुंबई

भाजपा और देवेंद्र फडणवीस जिस विदर्भ को अपनी राजनीतिक जागीर समझकर गढ़ की तरह पेश कर रहे थे, वहीं से अब उन्हें करारा झटका मिला है। उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने फडणवीस के गढ़ पर सीधा हमला बोलते हुए साफ कह दिया कि विदर्भ हर बार किसी एक पार्टी की जागीर या गढ़ रहेगा, यह मान्यता ही गलत है। दादा के इस प्रहार से महायुति में सीटों के लिए संग्राम और तेज हो गया है। विदर्भ की धरती से ही अजीत पवार ने भाजपा को खुली चुनौती दी है और साफ कर दिया है कि सत्ता के खेल में अब उनका गुट झुकने वाला नहीं है।
महायुति के भीतर सीटों के बंटवारे की खींचतान तेज होती दिख रही है। इसी बीच उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने भाजपा और देवेंद्र फडणवीस के गढ़ माने जाने वाले विदर्भ पर करारा बयान देकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। अजीतदादा ने साफ कहा कि विदर्भ हर बार किसी एक दल का गढ़ रहेगा ही, ऐसा मानना गलत है। विदर्भ ने अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग नतीजे दिए हैं। इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या दादा ने विदर्भ को भाजपा और फडणवीस की जागीर मानने से इनकार कर दिया है और क्या वे स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों में विदर्भ से ज्यादा हिस्सेदारी की तैयारी कर रहे हैं।
भाजपा की मजबूत पकड़ पर सीधा सवाल
विदर्भ को अब तक भाजपा और फडणवीस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेताओं का यही क्षेत्र होने से भाजपा की पकड़ और भी गहरी है। लेकिन अजीत पवार ने इस धारणा को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि विदर्भ में सभी दल सक्रिय हैं और भाजपा के साथ-साथ एकनाथ शिंदे गुट और हमारे गुट के कार्यकर्ताओं की भी उम्मीदें बराबर की हैं। अजीत पवार ने यह भी इशारा किया कि तीनों दलों को बैठकर आपसी समन्वय से ही आगे बढ़ना होगा।
चिंतन शिविर विदर्भ में क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि दादा गुट का पहला चिंतन शिविर विदर्भ में ही रखा गया है। इस पर जब सवाल उठा कि पश्चिम महाराष्ट्र को छोड़कर विदर्भ को क्यों चुना गया, तो प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने जवाब दिया कि विधानसभा चुनाव में यहां उनके गुट ने ८ में से ७ सीटें जीती थीं, यानी रिकॉर्ड ९० फीसदी सफलता रही है। तटकरे के मुताबिक, विदर्भ में उनके गुट की पकड़ मजबूत है। यही कारण है कि स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों से पहले विदर्भ से अपनी दावेदारी और आवाज बुलंद करने की रणनीति बनाई गई है।
दादा का संदेश
अजीत पवार और सुनील तटकरे के बयान साफ संकेत देते हैं कि महायुति में दादा  गुट अपने लिए ज्यादा सीटें चाहती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह दादा का मास्टर स्ट्रोक है, जिससे न सिर्फ महायुति के भीतर दबाव बनाया जा सके, बल्कि विदर्भ में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ाया जा सके।

अन्य समाचार