मुख्यपृष्ठस्तंभ‘द ब्लैक डाहलिया'-२ पुलिस को सीधा चैलेंज...!

‘द ब्लैक डाहलिया’-२ पुलिस को सीधा चैलेंज…!

मनमोहन सिंह

कत्ल के कुछ ही दिनों बाद, लॉस एंजिल्स के एक नामी अखबार के दफ्तर में एक रहस्यमयी पार्सल पहुंचा। पार्सल पर अखबार की कतरनों से अक्षर काटकर चिपकाए गए थे। जब उसे खोला गया, तो अंदर जासूसों के रोंगटे खड़े हो गए। उसमें एलिजाबेथ शॉर्ट के असली डाक्यूमेंट्स, उसकी तस्वीरें और एक छोटी सी डायरी थी, जिसमें हॉलीवुड के कई रसूखदार लोगों के नाम और फोन नंबर लिखे थे।
पार्सल के साथ एक नोट था, ‘डाहलिया का सामान जल्द ही आ रहा है… पुलिस का पीछा करना बंद करो।’ यह हत्यारे का पुलिस को सीधा चैलेंज था।
मामला अब सिर्फ एक मर्डर का नहीं रह गया था, यह हॉलीवुड के बड़े नामों को बेनकाब करने वाला टाइम-बम बन चुका था। डायरी के पन्नों को खंगालते हुए पुलिस के शक के दायरे में कई रसूखदार लोग आए। पहला नाम था मार्क हैनसेन का, जो हॉलीवुड के एक बड़े नाइट क्लब का मालिक था और एलिजाबेथ कुछ समय उसके घर पर रुकी थी। दूसरा संदिग्ध था डॉ. जॉर्ज हॉडेल, एक बेहद अमीर, प्रभावशाली और शातिर डॉक्टर।
जासूसों का मानना था कि एलिजाबेथ के शरीर को जिस सफाई और सर्जिकल सटीकता से दो हिस्सों में काटा गया था, वह काम केवल कोई कुशल डॉक्टर ही कर सकता था। जॉर्ज हॉडेल की अपनी बेटी ने बाद में दावा किया कि उसके पिता के घर के बेसमेंट से अक्सर चीखें सुनाई देती थीं। पुलिस ने हॉडेल के घर में गुप्त माइक्रोफोन भी लगाए, जिसमें एक जगह वह यह कहते सुने गए, ‘अगर मैंने ब्लैक डाहलिया को मारा भी है, तो कोई इसे साबित नहीं कर सकता।’ लेकिन हॉडेल के ऊंचे रसूख और पुख्ता सबूतों की कमी के कारण पुलिस के हाथ हमेशा खाली ही रहे।

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