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आईएएस सेवा प्रवेश परीक्षा में मानदंडों को लेकर विवाद गहराया!..सरकार बनाम अधिकारी का मामला हाई कोर्ट पहुंचा

सामना संवाददाता / मुंबई

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में नियुक्ति के लिए राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बनाए गए मानदंडों को लेकर मंत्रालय में उप सचिव ने मुंबई उच्च नयायालय में कैविएट दायर किया है। जिसके कारण सरकार बनाम अधिकारी का विवाद अब मुंबई उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इससे अब गैर-राज्य सिविल सेवाओं के अधिकारियों के लिए इस वर्ष की आईएएस सेवा प्रवेश परीक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गया है।गौरतलब हो कि आईएएस में ५ प्रतिशत सीटें गैर-राज्य सिविल सेवाओं के अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं। हर साल राज्य के दो या तीन अधिकारियों को यह अवसर मिलता है। सामान्य प्रशासन विभाग ने २४ जुलाई को इस वर्ष की परीक्षा के मानदंड और प्रक्रिया घोषित की है। इनमें अधिक सेवा अवधि, अधिक अंक का मानदंड विवादों में आ गया है और परीक्षार्थियों ने इसे महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (मैट) में चुनौती दी थी।
सेवा अवधि के लिए अधिक अंक देने का मानदंड मैट द्वारा ५ सितंबर को रद्द कर दिया गया था। इसके कारण राज्य सरकार को ७ सितंबर को होने वाली परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। राज्य सरकार मैट के फैसले के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय का रुख कर सकती है। इसलिए परीक्षार्थी अधिकारियों ने उससे पहले ही कैविएट दायर कर दिया है। बताया जाता है कि इस वर्ष ३५० अधिकारी परीक्षार्थी हैं। इनमें से ३० अधिकारियों ने वैâविएट दायर किया है, जिनमें मंत्रालय संवर्ग के २१ उप सचिव और बिक्री कर विभाग व नगर विकास विभाग के ९ अधिकारियों का समावेश है।
लंबा खिच सकता है विवाद
– बताया जाता है कि मैट के फैसले के खिलाफ अगर सरकार उच्च न्यायालय में जाती है तो विवाद लंबा खिंच जाएगा और इस साल परीक्षा आयोजित नहीं हो पाएगी।
– अगर इस साल परीक्षा आयोजित नहीं होती है, तो कुछ अधिकारियों को आईएएस सेवा में प्रवेश का अवसर गंवाना पड़ेगा।
– बताया जाता है कि मैट में हार का सामना करने के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग अपने मानदंडों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
-नतीजतन, सामान्य प्रशासन विभाग और उप सचिव के बीच की लड़ाई हाई कोर्ट पहुंच गई है।

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