-हवाला के जरिए कैश में कनवर्ट करते थे रकम
सामना संवाददाता / मुंबई
इन दिनों हर तरफ डिजिटल अरेस्ट का खौफ छाया हुआ है। साइबर क्रिमिनल्स बड़ी सफाई से इसे अंजाम देते हैं। हाल ही में पुलिस ने एक ऐसे ही साइबर गैंग को दबोचा है। यह गैंग गुजरात से डिजिटल अरेस्ट का खेल चला रहा था।
बता दें कि गुजरात में साइबर अपराध की दुनिया से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए ‘ईडी’ ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने देशभर में कई लोगों को फंसाकर १०० करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। इन आरोपियों में एक बाप-बेटा भी शामिल हैं। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई जांच एजेंसी के सूरत उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत किया है। डॉक्टर अपने बेटे और अन्य लोगों के साथ एक संगठित गिरोह बनाकर साइबर ठगी रैकेट चलाता था। ये लोग कभी खुद को ईडी और सीबीआई के अधिकारी बताते थे, तो कभी सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फर्जी नोटिस भेजते थे। भोले-भाले लोगों को डराकर पैसे ऐंठ लेते।
आरोपियों ने ठगी से हुई कमाई को छिपाने के लिए अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और कुछ भाड़े के लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए। इन खातों में ठगी के पैसे जमा किए। इसकी कुल रकम १०० करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। ईडी की जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने ठगी से जुटाई रकम को वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय रास्ते अपनाए। जांच एजेंसियों को धोखा देने की कोशिश की गई।
क्रिप्टोकरेंसी खरीदते थे
आरोपियों ने पहले मोबाइल सिम कार्ड खरीदकर बैंक खातों को ऑपरेट किया और फिर पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया। इसके बाद रकम हवाला ऑपरेटरों के जरिए वैâश में कन्वर्ट कर ली गई। इस तरह ट्रांजेक्शन के निशान मिटाने की कोशिश की गई। ये नेटवर्क ‘डिजिटल अरेस्ट’, विदेशी मुद्रा निवेश और कानूनी नोटिस के नाम पर आम लोगों को फंसाने में माहिर था।
