सामना संवाददाता / मुंबई
विधानसभा सदस्यों द्वारा विधानसभा में पेश कटौती प्रस्ताव पर संबंधित विभाग को एक माह के भीतर मंत्री द्वारा हस्ताक्षरित लिखित उत्तर देना अनिवार्य है, लेकिन विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए गए कटौती प्रस्ताव का उत्तर देने में नगर विकास विभाग प्रशासन आनाकानी यानी टालमटोल कर रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) विधायक सुनील प्रभु ने पत्र के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर का इस ओर ध्यान आकर्षित किया है।
मानसून सत्र में विपक्षी दल को मिले अधिकारों के अंतर्गत वर्ष २०२५-२६ की अनुपूरक मांगों पर कटौती प्रस्ताव पेश किए गए। ९ जुलाई २०२५ की सूची में नगर विकास विभाग के अंतर्गत क्रम संख्या ३० से ३७, कटौती प्रस्ताव संख्या ६९५ से ७०२ के अंतर्गत प्रस्तुत किए गए थे। ये सभी कटौती प्रस्ताव मालाड पूर्व दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र के जनहित में अत्यंत महत्वपूर्ण थे। मानसून सत्र के दो महीने बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई लिखित जवाब नहीं मिला है। सुनील प्रभु ने मांग की है कि नगर विकास विभाग को इस संबंध में उचित निर्देश दिए जाएं। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में कई बार कटौती प्रस्तावों पर तुरंत जवाब देने के निर्देश संबंधित विभाग के मंत्रियों को दिए हैं, लेकिन कटौती प्रस्तावों पर जवाब देने की परंपरा का पालन नहीं किया जा रहा है, ऐसा उल्लेख प्रभु ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में किया है। बता दें कि विपक्ष द्वारा पेश एक रुपए का भी कटौती प्रस्ताव अगर पास हो जाता है सरकार गिर सकती है। इसलिए सदन में अंदर कटौती प्रस्ताव बहुत ही कम आते है। अगर आते तो सरकार पूरी ताकत से विपक्ष के कटौती प्रस्ताव को पास नहीं होने देती है। हालांकि इस संदर्भ में सरकार को लिखित पत्र की प्राप्ति के एक महीने के अदंर सदस्यों द्वारा उठाए गए कटौती प्रस्ताव का उत्तर देना बंधनकारक है।
