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महायुति सरकार का अमानवीय चेहरा बेनकाब

-डीजल के पैसे नहीं दिए, बीमार बच्ची को सरकारी एंबुलेंस से उतारा
-मजदूर पिता बेटी को कंधे पर उठाकर चलने को मजबूर
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के सरकारी दावों की पोल खोलने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। बीड जिले के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डीजल के पैसे नहीं होने पर एक बीमार बच्ची को सरकारी एंबुलेंस से उतार दिया गया। हद तो तब हो गई, जब बच्ची की बेबस दादी से कथित रूप से कहा गया कि बच्चों को पालने की हैसियत नहीं है तो उन्हें जन्म क्यों दिया? इस अमानवीय व्यवहार का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह घटना २९ सितंबर की है। छठी कक्षा में पढ़ने वाली ११ वर्षीय सीमा सोलंके स्कूल में अचानक चक्कर आने से गिर पड़ी। उसे तत्काल दिंद्रुड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उसे अंबाजोगाई के सरकारी अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी एंबुलेंस से बच्ची को समय पर उपचार मिल जाएगा, लेकिन परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस के डीजल के लिए पैसे मांगे गए। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार ने असमर्थता जताई तो उन्हें वाहन से उतरने के लिए कहा गया। इसके बाद मजदूर पिता अपनी बीमार बेटी को कंधे पर उठाकर ले जाने को मजबूर हो गया। बच्ची की मां का छह वर्ष पहले निधन हो चुका है और परिवार के चार बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी बेहद कठिन परिस्थितियों में निभाई जा रही है। यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है।

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