-अब्राहम अकॉर्ड्स पर साइन करने का ऑफर ठुकराया
-अमेरिका और सऊदी अरब के बीच बढ़ा विवाद
एजेंसी / रियाद
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के मध्य अब एक नई जंग पर्दे के पीछे शुरू होती दिख रही है। इस बार मामला सीधे वॉशिंगटन और उसके सबसे पुराने अरब सहयोगी सऊदी अरब के बीच का है। वजह बनी है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नई रणनीति, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ दिया। ऐसे में सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को आंखें दिखाते हुए उनकी इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया।
बता दें कि २५ मई को ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते का हिस्सा बनने के लिए मुस्लिम देशों को एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे। ट्रंप ने खास तौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान का नाम लेते हुए इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही। लेकिन ट्रंप की यह अपील खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब को बिल्कुल पसंद नहीं आई। सऊदी अधिकारियों ने साफ कहा कि जब तक फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन के लिए ‘स्पष्ट रास्ता’ तय नहीं होता, तब तक इजरायल के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं। इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि गाजा युद्ध के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति पहले जैसी नहीं रही। दो साल पहले गाजा से हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया और फिर एक बड़ी जंग शुरू हो गई। यही वजह रही कि सऊदी-इजरायल के बीच रिश्ते स्थापित नहीं हो पाए, लेकिन मौजूदा हालात में सऊदी अरब किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के मूड में नहीं दिख रहा।
अमेरिका की गलती
अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने इस ऑपरेशन की घोषणा खाड़ी सहयोगियों से पूरी सहमति लिए बिना कर दी। इससे सऊदी नेतृत्व नाराज हो गया और सिर्फ ३६ घंटे में ही यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।
होर्मुज को लेकर सऊदी की नाराजगी
यह विवाद सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है। इसके पीछे होर्मुज को लेकर बढ़ता तनाव भी बड़ा कारण है। मई की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने ‘प्रोजेक्ट प्रâीडम’ नाम से एक सैन्य मिशन शुरू करने की कोशिश की थी। इसका मकसद होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि ईरान वहां अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है।
