-न निवेश हो रहा है और न ही युवाओं को मिल रही हैं नौकरियां
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की महायुति सरकार का विकास कागजों पर तेज गति से चल रहा है और लाखों युवाओं को नौकरियां देने के वादे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रत्यक्ष रूप से न निवेश हो रहा है और न ही युवाओं को नौकरियां मिल रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले दो सालों में महायुति सरकार की ओर से की गई घोषणाओं के आधार पर राज्य सरकार ने दो वर्षों में ५ लाख करोड़ से अधिक के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे २.५ लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से ऐसा होता हुआ कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। क्योंकि बेरोजगारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र रोजगार कार्यालय में करीब ७१ लाख से अधिक युवाओं ने अपना नाम पंजीकृत कराया है। इसके अलावा जिन लोगों ने महाराष्ट्र रोजगार कार्यालय में अपना नाम दर्ज नहीं कराया है, उनकी संख्या लाखों में है।
बता दें कि महायुति सरकार ने अगस्त २०२५ के अंत में विभिन्न कंपनियों के साथ १७ समझौतों ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिससे ३४ हजार करोड़ निवेश आने और ३३ हजार रोजगार उपलब्ध होने का दावा किया गया था।
५.२ लाख नौकरियां पैदा होने की जताई गई थी उम्मीद
इसी प्रकार सितंबर २०२५ की शुरूआत में सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब जैसे क्षेत्रों में १.०८ करोड़ रुपए के एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिससे ४७ हजार नौकरियां सृजित होने का दावा सरकार ने किया था। इसी प्रकार हाल ही में स्टील महाकुंभ कार्यक्रम में सरकार ने नौ कंपनियों से ८०,९६२ करोड़ रुपए के करार किए हैं, जिससे ४०,३०० से अधिक नौकरियां उपलब्ध होने का दावा सरकार की ओर से किया गया है। ये परियोजनाएं गडचिरौली, चंद्रपुर, नागपुर, वर्धा, रायगड, छत्रपति संभाजीनगर, सतारा आदि में स्थापित की जाएंगी।
