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‘महायुति’ का खोखला वादा…२०० नई एंबुलेंस तैनात, फिर भी शिकायतों का लगा अंबार!

-अगले माह हेलिकॉप्टर एंबुलेंस सेवा का नया जुमला

सामना संवाददाता / मुंबई

महायुति सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे दावों की पोल परत-दर-परत खुल रही है। सरकार ने हाल ही में २०० नई एंबुलेंस तैनात करने का बड़ा एलान किया था, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं में कमी और देरी की शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। इस बीच महायुति के स्वास्थ्य मंत्री ने एक और खोखला वादा किया है कि अगले माह हेलिकॉप्टर एंबुलेंस सेवा शुरू की जाएगी। हमेशा की तरह इस बार भी इसे जनता सरकार का नया जुमला मान रही है। लोगों का कहना है कि एंबुलेंस सेवाओं की तत्काल कमी को दूर किए बिना, केवल खोखले वादे करना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
महायुति सरकार के खोखले वादों ने आम जनता का भरोसा पूरी तरह हिला दिया है। २०० नई एंबुलेंस और हेलिकॉप्टर एंबुलेंस जैसी घोषणाओं के बावजूद राज्यभर में मरीजों तक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा है कि २०० अत्याधुनिक एंबुलेंस ५जी तकनीक आधारित होंगी, जिसमें वेंटिलेटर समेत २५ से अधिक मेडिकल उपकरण होंगे। इस सेवा से दुर्गम क्षेत्रों में मरीजों की जान बचाना और अधिक आसान हो जाएगा। इसके साथ ही नवंबर से दो हेलीकॉप्टर के माध्यम से एअर एंबुलेंस सेवा शुरू की जाएगी। यह महाराष्ट्र आपातकालीन चिकित्सा सेवा के तहत उपलब्ध होगी। एअर एंबुलेंस के अलावा पांच समुद्री बोटें भी एंबुलेंस सेवाओं में शामिल की जाएंगी। मंत्री आबिटकर ने माना कि स्वास्थ्य विभाग को एंबुलेंस सेवाओं के संबंध में काफी शिकायतें मिल रही थीं। इसलिए इन सेवाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
खोखली छवि पर धब्बा
महायुति सरकार द्वारा घोषित स्वास्थ्य विभाग में लोकलुभावन सेवाओं के बावजूद आम जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि घोषणाओं की चमक और वास्तविक सेवाओं के बीच का अंतर महायुति सरकार की खोखली छवि को उजागर कर रहा है। जनता अब वादों पर विश्वास खो चुकी है और सेवाओं में वास्तविक सुधार की मांग जोर पकड़ रही है।
एंबुलेंस न मिलने से संकट में जिंदगी
राज्य में एंबुलेंस सेवाओं की सुस्ती और देरी अब सीधे घातक साबित हो रही है। समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण कई गंभीर मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रसूताओं ने रास्ते में ही बच्चों को जन्म दिया। यह स्थिति सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर असफलता को उजागर करती है। ऐसे में सरकार का यह खोखला वादा एक बार फिर से उसकी नीयत पर सवाल खड़े करने लगा है।

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