सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में चुनावी माहौल गरमाने के साथ ही महायुति सरकार ने प्रशासनिक ताश के पत्ते फेरने का खेल शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने अचानक सात वरिष्ठ आईएएस अफसरों के तबादलों के आदेश जारी कर दिए, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। रत्नागिरी, नासिक और जलगांव जैसे अहम जिलों में मनपसंद नए कलेक्टरों की नियुक्ति कर बिसात बिछा दी है।
जिन अधिकारियों के तबादले हुए हैं उनमें रत्नागिरी के जिलाधिकारी एम. देवेंद्र सिंह का तबादला कर उन्हें महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, मुंबई में सदस्य सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है, वहीं पिंपरी-चिंचवड मनपा के आयुक्त शेखर सिंह को नासिक कुंभमेला आयुक्त बनाकर भेजा गया है। नासिक के जिलाधिकारी जलज शर्मा का तबादला नासिक महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के महानगर आयुक्त के रूप में किया गया है। उनकी जगह जलगांव के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद को नासिक के नए जिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। इसी बीच ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहन घुगे को जलगांव जिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। मनोज जिंदल को रत्नागिरी जिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। इन तबादलों के चलते राज्य की प्रशासनिक मशीनरी के महत्वपूर्ण पदों पर नए जिम्मेदार अधिकारी कार्यभार संभालेंगे। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह बदलाव सरकार की मनपसंद पोस्टिंग की रणनीति का हिस्सा है, ताकि आने वाले निकाय चुनावों में प्रशासनिक स्तर पर लाभ लिया जा सके।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
इन तबादलों के जरिए महायुति सरकार अपने नियंत्रण में प्रशासनिक मशीनरी को कसने में जुटी है। यही कारण है कि सरकार चुनावी रणनीति के तहत अफसरों की पसंद-नापसंद को प्राथमिकता दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे अचानक और व्यापक तबादले स्थानीय प्रशासन में गतिशीलता तो लाएंगे, लेकिन इससे पारदर्शिता और तटस्थता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
